नवीन कुमार
कोन (सोनभद्र)। पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज में आयोजित आठ दिवसीय भारतीय भाषा समर कैंप ने विद्यार्थियों को भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराया। 13 मई से 20 मई तक चले इस विशेष कैंप में छात्रों ने न केवल विभिन्न भारतीय भाषाओं की विशेषताओं को जाना, बल्कि देश की सांस्कृतिक एकता और परंपराओं को भी करीब से समझा।
कैंप के दौरान विद्यार्थियों को कोलकाता के इतिहास, संस्कृति, साहित्य और भूगोल की विस्तृत जानकारी दी गई। शिक्षकों ने बताया कि हुगली नदी के तट पर बसा कोलकाता अपनी ऐतिहासिक विरासत, कला, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान के कारण विश्वभर में “सिटी ऑफ जॉय” के नाम से प्रसिद्ध है। छात्रों को दुर्गा पूजा, रवीन्द्र संगीत, बंगाली साहित्य और कला परंपरा से परिचित कराया गया। साथ ही बंगाली भाषा की साहित्यिक समृद्धि और भारतीय संस्कृति में उसके योगदान पर भी चर्चा हुई।
समर कैंप के उर्दू भाषा सत्र ने विद्यार्थियों को विशेष रूप से आकर्षित किया। छात्रों ने उर्दू की नज़ाकत, शायरी, ग़ज़ल और अदब की परंपरा को समझते हुए भाषा की मिठास को महसूस किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने उर्दू के शब्दों, शेरों और अभिव्यक्तियों का अभ्यास कर अपनी प्रतिभा भी दिखाई। शिक्षकों ने कहा कि भारतीय भाषाएँ केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि देश की साझा सांस्कृतिक आत्मा हैं।
समापन समारोह में विद्यालय के प्रधानाचार्य शिशिर कुमार ने कहा कि भारत की भाषाई विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक सम्मान और भाषाई सौहार्द को मजबूत करते हैं। उन्होंने छात्रों से विभिन्न भारतीय भाषाओं को सीखने और उन्हें संरक्षित करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में समर कैंप में प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित कर सम्मानित किया गया। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की भावना को समझने का जीवंत अनुभव साबित हुआ।






