सोनभद्र में ‘उड़ता कूड़ा’ बना स्वास्थ्य पर संकट

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अमित मिश्रा

O- नगर पालिका प्रशासन की घोर अनियमितता

O- अधिशाषी अधिकारी पर लापरवाही के आरोप

सोनभद्र । स्वच्छता के दावों के बीच सोनभद्र नगर पालिका की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। शहर के भीड़भाड़ वाले बाजारों से दिनदहाड़े खुले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में कूड़ा ढोया जा रहा है। कूड़े को न तो ढंका जा रहा है और न ही निर्धारित समय सुबह या देर शाम का पालन किया जा रहा है। परिणामस्वरूप कूड़ा उड़कर दुकानों, खाद्य सामग्री और राहगीरों पर गिर रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने सीधे तौर पर नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी पर लापरवाही का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

नागरिकों का रोष और कटाक्ष

नगर क्षेत्र के लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा-

“अगर नियम सिर्फ कागजों पर ही लागू करने हैं तो नगर पालिका कार्यालय में ही कूड़ा डाल दिया जाए। जब शहर की सड़कों पर उड़ता कूड़ा आम जनता के स्वास्थ्य से खेल रहा है, तो जिम्मेदार अधिकारी क्या देख रहे हैं?”

व्यापारियों का कहना है कि कूड़ा उड़कर दुकानों में घुस रहा है, जिससे ग्राहकों और सामान दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है। कई लोगों ने इसे “प्रशासनिक उदासीनता” करार दिया है।

नगर पालिका अध्यक्ष का बयान

नगर पालिका अध्यक्ष ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा-

“नगर क्षेत्र में नियमित कूड़ा उठान की व्यवस्था है। यदि कहीं भीड़भाड़ के समय कूड़ा ले जाया जा रहा है तो यह संज्ञान में लाया गया है। संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए जाएंगे कि निर्धारित समय का पालन हो और कूड़ा ढककर ही ले जाया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह की कड़ी फटकार

मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने नगर पालिका प्रशासन पर नाराजगी जताई है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा-

“जनस्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिशाषी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि कूड़ा उठान निर्धारित समय पर ही हो और सभी गाड़ियां पूरी तरह ढंकी हों। यदि दोबारा ऐसी शिकायत मिली तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।”

जिलाधिकारी ने तत्काल निरीक्षण और रिपोर्ट तलब करने के निर्देश भी दिए हैं।

अब जिम्मेदारी किसकी?

स्वच्छता व्यवस्था की कमान जिन हाथों में है, उन्हीं पर सवाल उठ रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक व्यवस्था में सुधार की उम्मीद बेमानी है।

सोनभद्र की जनता अब आश्वासन नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव चाहती है।
अब देखना यह है कि अधिशाषी अधिकारी फटकार के बाद जागते हैं या फिर “उड़ता कूड़ा” ही प्रशासन की कार्यशैली का प्रतीक बना रहेगा।

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