दक्षिणांचल सहित सोनभद्र के शिक्षित युवाओं ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से की रोजगार की मांग
म्योरपुर (सोनभद्र)। जिले में स्थित कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की पांच माइंस संचालित हैं। एनसीएल की इन परियोजनाओं में ओबी कंपनियां भी ओवरबर्डन सहित अन्य काम करती हैं, बावजूद इसके जिले सहित दक्षिणांचल के युवा बेरोजगार हैं। ओबी कंपनियों में उत्तर प्रदेश से ज्यादा आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात सहित अन्य प्रदेश के लोग काम कर रहे हैं। जिले एवं दक्षिणांचल क्षेत्र में आदिवासियों की संख्या अधिक है और यहां के गरीब आदिवासी व अन्य वर्ग के लोग बेरोजगार हैं। खासतौर पर दक्षिणांचल की भौगोलिक स्थिति ठीक नहीं है। इस क्षेत्र के लोग ऊंची-नीची जमीन पर कच्चे मकान बनाकर किसी तरह जीविकोपार्जन करते हैं। देश में सबसे ज्यादा प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में सिंगरौली एवं सोनभद्र शामिल हैं। यहां के लोग कोल परियोजना व पावर प्लांट से निकलने वाले प्रदूषण की मार झेल रहे हैं, लेकिन यहीं के लोग कोल परियोजना सहित अन्य पावर प्लांट में प्राइवेट नौकरी के अभाव से ग्रसित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जिले के बेरोजगार युवाओं को यहीं नौकरी मिल जाए तो उन्हें बाहर अन्य प्रदेश नहीं जाना पड़ेगा। वे यहीं रहकर घर के कामों के साथ नौकरी भी कर सकेंगे। बाहर काम करने पर दोहरी मार झेलनी पड़ती है— पैसे की बचत नहीं हो पाती और घर पर जरूरी काम पड़ने पर आने में समय लगता है। स्थानीय बबई सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत दुबे, अरविंद, पंकज, दिनेश, किशन, सूरज, ज्ञानप्रकाश, अमर सिंह खरवार, कमलेश, धर्मेंद्र आदि ने स्थानीय जनप्रतिनिधि व जिला प्रशासन से इस ओर ध्यान देकर जल्द रोजगार दिलाने की मांग की है, ताकि दक्षिणांचल सहित जिले के शिक्षित युवा बेरोजगारों को काम मिल सके।






