डीजीएमएस की टीम ने खदान का किया निरीक्षण,हादसे की जानी हकीकत

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अमित मिश्रा

एक ही दिन दो अलग अलग इलाकों में हुए पत्थर खदान में हुए हादसे से दहला जनपद

दो अलग अलग इलाकों में एक मजदूर की मौत, तीन घायल , जांच में पहुंची डीजीएमएस टीम

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। सूबे की योगी सरकार जनपद की पत्थर खदाने जो मौत का कुंआ बन चुकी है में होने वाले हादसो पर रोक लगाने के लिए भले ही कोई नियम बना ले लेकिन काम तो पट्टेधारक अपने ही नियम से करेगा। जनपद में शनिवार को बिल्ली-मारकुंडी और सुकृत पत्थर खदानों में हादसा हुआ जिसमे एक मजदूर की मौत हो गयी जबकि तीन का वाराणसी ट्रामा सेन्टर में इलाज चल रहा है।  रविवार को डीजीएमएस वाराणसी की टीम ने बिल्ली मारकुंडी पत्थर खदान और सुकृत खदान का निरीक्षण किया। डीजीएमएस वाराणसी टीम के साथ जिले के खनिज विभाग , ओबरा एसडीएस, ओबरा सीओ व स्थानीय प्रशासन की टीम भी मौजूद रही। वही जांच टीम के द्वारा पत्थर खनन क्षेत्र का बारीकी से जांच किया गया। इस दौरान जांच टीम लगातार मीडिया से बचती रही और किसी भी सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। वही इस हादसे के बाद खदान संचालकों के द्वारा मामले को दबाने का भी प्रयास किया गया।

ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र के श्री स्टोन पत्थर खदान में हुआ जिसमें कार्य के दौरान टिपर के पहाड़ से नीचे गिरने से हो गया। जिसमें एक मजदूर की मौके पर मौत हो गई जबकि दूसरा मजदूर गम्भीर रूप से घायल हो गया। इस घटना को छिपाने के उद्देश्य से खदान मालिक द्वारा दोनों को बगैर पुलिस को सूचना दिए ही जिला अस्पताल पहुंचे और मृतक को पोस्टमार्टम हाउस में रखवा कर घायल मजदूर को वाराणसी ट्रामा सेंटर लेकर चले गए। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है । वही मौके पर पहुंची जांच टीम जांच कर अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपने की बात कह कर चली गई।

वही शिकायतकर्ता आकाश जायसवाल ने बताया कि बिल्ली मारकुंडी खनन इलाके के श्री स्टोन खदान में कार्य के दौरान हादसा हुआ जिसमें एक मजदूर की मौत के बाद बगैर पुलिस को सूचना दिए ही खदान संचालकों ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया, जबकि घायल को वाराणसी ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। हमारी मांग है कि सभी पत्थर खदानों में सीसी टीवी कैमरा लगाने का नियम है तो जिला प्रशासन इसे क्यो नही लगवा रहा है। इसके साथ ही अगर खदान में कोई घटना होती है तो उसे खनन हादसा कहा जाय और खदान के बाहर सड़क पर कोई घटना होती है तो उसे दुर्घटना बताया जाए ताकि गरीब मजदूरों को न्याय मिल सके। पत्थर खदान में कोई घटना का सही तरीके से उल्लेख नही होने के कारण मजदूरों को मुआवजा नही मिल पाता है।

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