श्री राम जानकी मंदिर में भागवत कथा के तृतीय दिवस ध्रुव-प्रह्लाद चरित्र का हुआ वर्णन

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आचार्य मनोहर कृष्ण महाराज ने सुनाई कथा, वामन अवतार की झांकी ने मोहा मन

सोनभद्र। श्री राम जानकी मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस वृंदावन से पधारे कथा व्यास आचार्य मनोहर कृष्ण जी महाराज ने ध्रुव चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि ध्रुव ने साढ़े पांच वर्ष की आयु में ही भगवान को प्राप्त कर लिया। प्रभु चरित्र से यह ज्ञान मिलता है कि भजन की कोई उम्र नहीं होती। यदि हम भी ध्रुव की तरह भक्ति करें तो भगवान अवश्य कृपा करेंगे।
कथा में आगे भाव, नर्कों का वर्णन, जीव की गति व कर्म के अनुसार गति का वर्णन किया गया। प्रह्लाद चरित्र सुनाते हुए कहा कि भक्त प्रह्लाद ने दैत्यों के बीच रहकर भी भगवान की भक्ति की। इससे सीख मिलती है कि भजन में बाधा तो आ सकती है, पर उसे कोई रोक नहीं सकता।
गजेंद्र मोक्ष प्रसंग के माध्यम से बताया कि जब अंतिम समय में कोई साथ नहीं देता, तब भगवान साथ देते हैं। यदि हम भगवान को मान लें तो उनकी कृपा अवश्य होगी। इसके बाद वामन अवतार की सुंदर झांकी के दर्शन कराए गए। वामन भगवान राजा बलि के द्वार पर गए और तीन पग भूमि मांगी। देवताओं की कार्य सिद्धि के लिए वामन भगवान ने विराट रूप धारण किया।
इस अवसर पर मार्कण्डेय पाठक, ओमप्रकाश पाठक, महेंद्र प्रसाद शुक्ला, आशुतोष पाठक, रमेश देव पाण्डेय, अजीत शुक्ला, प्रदीप चौरसिया, बीरबल गुप्ता, प्रेमकांत, धीरज पाण्डेय, जितेन्द्र पाण्डेय, शिवम् मिश्रा आदि मौजूद रहे।

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