BSP विधायक उमाशंकर सिंह का निधन: कैंसर से जूझते हुए ली अंतिम सांस, यूपी विधानसभा में बसपा की इकलौती आवाज हुई खामोश

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लखनऊ/बलिया। उत्तर प्रदेश की राजनीति से बुधवार को एक बड़ी और दुखद खबर सामने आई है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) के रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक उमाशंकर सिंह का निधन हो गया है। वह लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही बलिया से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई।

उमाशंकर सिंह सिर्फ बलिया के रसड़ा क्षेत्र के विधायक नहीं थे, बल्कि मौजूदा उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक थे। ऐसे में उनका निधन व्यक्तिगत क्षति के साथ-साथ बसपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका भी माना जा रहा है।

55 साल की उम्र में राजनीतिक सफर का अंत

उमाशंकर सिंह का जन्म 2 जनवरी 1971 को बलिया के खनवर गांव में हुआ था। उत्तर प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक उनके पिता का नाम घुरहू सिंह था। उन्होंने इंटरमीडिएट तक शिक्षा हासिल की थी और उनका व्यवसाय व्यापार से जुड़ा था।

लगभग 55 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ। राजनीति में उनकी पहचान एक ऐसे नेता के तौर पर बनी, जिन्होंने अपने क्षेत्र में लगातार चुनावी पकड़ कायम रखी और बड़े राजनीतिक समीकरणों के बावजूद रसड़ा सीट पर बसपा का झंडा बुलंद रखा।

2012 से 2022 तक लगातार जीत

उमाशंकर सिंह की राजनीतिक ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में रसड़ा सीट से जीत दर्ज की।

2022 के विधानसभा चुनाव में जब उत्तर प्रदेश में भाजपा का दबदबा था और बसपा अपने सबसे कमजोर चुनावी दौर से गुजर रही थी, उस समय भी उमाशंकर सिंह ने रसड़ा सीट पर बसपा का कब्जा बरकरार रखा।

2022 में उन्हें 87,887 वोट मिले और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से पीछे छोड़ा। इसी चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा के पास सिर्फ रसड़ा सीट बची थी और उमाशंकर सिंह पार्टी के एकमात्र विधायक बन गए थे।

यानी जिस दौर में उत्तर प्रदेश में बसपा का विधानसभा ग्राफ लगातार नीचे जा रहा था, उस समय उमाशंकर सिंह रसड़ा में पार्टी की सबसे मजबूत राजनीतिक दीवार बनकर खड़े रहे।

बसपा के लिए क्यों बड़ा झटका?

उमाशंकर सिंह का निधन ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में बसपा पहले ही विधानसभा में बेहद कमजोर स्थिति में है।

2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा को प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में सिर्फ एक सीट मिली थी, रसड़ा। उस एक सीट का प्रतिनिधित्व उमाशंकर सिंह कर रहे थे।

इसलिए उनके निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब रसड़ा विधानसभा सीट पर उपचुनाव कब होगा और बसपा इस सीट को बचाने के लिए किस चेहरे पर दांव लगाएगी?

यह उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं होगा। यह उत्तर प्रदेश में बसपा की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और उसके जमीनी प्रभाव का भी एक बड़ा टेस्ट बन सकता है।

मायावती के करीबी नेताओं में गिनी जाती थी उनकी पहचान

उमाशंकर सिंह को बसपा प्रमुख मायावती के करीबी और भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता था।

जब वह कैंसर से जूझ रहे थे, तब मायावती ने उनसे मुलाकात भी की थी। मार्च 2025 में मायावती की उमाशंकर सिंह से मुलाकात की खबर सामने आई थी। उस समय भी उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई गई थी।

बीमारी के कारण वह पार्टी की गतिविधियों और विधानसभा के कामकाज से भी दूरी बनाए हुए थे।

कैंसर से लंबी लड़ाई

उमाशंकर सिंह लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। 2026 की शुरुआत में उनके स्वास्थ्य को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा उस समय भी तेज हुई थी, जब उनके आवास और उनसे जुड़े परिसरों पर आयकर विभाग की कार्रवाई की खबर सामने आई थी।

उस दौरान सार्वजनिक रूप से यह भी सामने आया था कि वह कैंसर का इलाज करा रहे थे और उनकी तबीयत गंभीर थी।

लेकिन बीमारी के बावजूद उन्होंने अपनी राजनीतिक सक्रियता और अपने क्षेत्र से जुड़ाव बनाए रखने की कोशिश की।

अब उनके निधन की खबर ने उनके समर्थकों और रसड़ा की जनता को गहरे शोक में डाल दिया है।

रसड़ा की राजनीति में अलग पहचान

बलिया का रसड़ा विधानसभा क्षेत्र पूर्वांचल की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। उमाशंकर सिंह ने लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतकर यह साबित किया कि उनकी क्षेत्रीय पकड़ मजबूत थी।

उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि यह रही कि उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक लहरों के बीच अपनी सीट बचाए रखी।

2017 में भाजपा की मजबूत लहर के दौरान भी वह चुनाव जीतने में सफल रहे और 2022 में जब बसपा का प्रदर्शन पूरे प्रदेश में बेहद कमजोर रहा, तब भी उन्होंने रसड़ा में पार्टी का किला बचाए रखा।

यही वजह है कि उमाशंकर सिंह को बसपा के उन चुनिंदा नेताओं में गिना जाता था, जिन्होंने कठिन राजनीतिक दौर में भी पार्टी का झंडा जमीन पर कायम रखा।

विधानसभा रिकॉर्ड में भी दर्ज है सक्रियता

उत्तर प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक सदस्य रिकॉर्ड में उमाशंकर सिंह के नाम के साथ विधानसभा चर्चाओं और प्रश्नों का रिकॉर्ड दर्ज है। आधिकारिक प्रोफाइल में उनके नाम से 267 प्रश्न और 12 चर्चाएं दर्ज हैं।

इससे यह भी पता चलता है कि विधानसभा के भीतर उन्होंने अपने क्षेत्र और विभिन्न मुद्दों को उठाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

अब आगे क्या?

उमाशंकर सिंह के निधन के बाद सबसे बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक सवाल रसड़ा विधानसभा सीट को लेकर है।

अब इस सीट पर उपचुनाव होगा और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि:

क्या बसपा रसड़ा का अपना गढ़ बचा पाएगी?

क्या मायावती किसी नए चेहरे पर भरोसा करेंगी?

क्या भाजपा और सपा इस सीट को अपने पाले में लाने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगी?

और सबसे बड़ा सवाल-

क्या उमाशंकर सिंह के निधन के बाद रसड़ा की राजनीति में कोई नया अध्याय शुरू होगा?

यह आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।

एक विधायक नहीं, बसपा की आखिरी विधानसभा आवाज

उमाशंकर सिंह के निधन को सिर्फ एक विधायक के निधन के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी।

वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा की एकमात्र निर्वाचित आवाज थे।

एक ऐसी पार्टी के लिए, जिसने कभी उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी, आज विधानसभा में सिर्फ एक विधायक का होना अपने आप में बसपा के राजनीतिक सफर की बड़ी कहानी बताता है।

और उस एक विधायक का चेहरा उमाशंकर सिंह थे।

आज उनके निधन के साथ विधानसभा में बसपा की वह इकलौती आवाज भी खामोश हो गई है।

बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर अब थम गया है, लेकिन तीन बार की चुनावी जीत, कठिन दौर में बसपा का झंडा थामे रखना और अपने क्षेत्र में बनाई गई राजनीतिक पहचान लंबे समय तक याद की जाएगी।

न्यूज़ Express भारत की तरफ से उमाशंकर सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि।

ॐ शांति।

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