सोनभद्र-सिंगरौली में घटते हरित आवरण से बढ़ रहा तापमान, ऊर्जा पर्यावरण में संतुलन की चुनौती

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2001 से 2025 तक देश में 5.6% हरित आवरण घटा, विशेषज्ञों ने कहा – समन्वय से ही होगा समाधान

म्योरपुर / सोनभद्र। देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने वाले सोनभद्र-सिंगरौली क्षेत्र में कोयला आधारित बिजली उत्पादन और घटते हरित आवरण के बीच पर्यावरण संतुलन की चुनौती बढ़ रही है।
क्लाइमेट ट्रेंड्स के अध्ययन के अनुसार 2001 से 2025 के बीच भारत के कुल हरित आवरण में 5.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। अध्ययन के मुताबिक हरित और गैर-हरित क्षेत्रों के बीच गर्मियों के औसत तापमान में 1 से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक का अंतर पाया गया। पेड़-पौधे कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर छाया और वाष्पोत्सर्जन से तापमान नियंत्रित करते हैं, जबकि जंगल की जगह खुली जमीन, खनन क्षेत्र और कंक्रीट बढ़ने से तापमान और मिट्टी की नमी प्रभावित होती है।
कोयला आधारित बिजली और उत्सर्जन पर्यावरण वैज्ञानिक प्रेम नारायण के अनुसार क्षेत्र में प्रतिदिन करीब तीन लाख टन कोयला जलने से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड जलवायु परिवर्तन में योगदान देती है। तापीय संयंत्रों से निकलने वाले सूक्ष्म कण, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं। एम्स भोपाल के अध्ययन में राख के अनुचित निस्तारण से मिट्टी और जलस्रोतों पर असर की बात कही गई है।
विशेषज्ञों ने कहा जिला प्रशासन, वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और तापीय परियोजनाओं के बीच समन्वय बढ़ाकर हरित आवरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना होगा। आईआईटी के पूर्व प्रोफेसर एके शर्मा ने कहा नियमों के पालन के लिए ग्रामीणों को जागरूक होना जरूरी है।

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