कचहरी में सजी रक्षा सूत्र काव्य संध्या, कवियों ने बांधा समां

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सोनभद्र। दयानंद साहित्य संस्थान सोनभद्र की ओर से रक्षाबंधन के अवसर पर शुक्रवार शाम कचहरी परिसर में रक्षा सूत्र काव्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार अजय चतुर्वेदी कक्का ने की। उन्होंने “कत्ल करना है मेरा तो सर है हाजिर कीजिए, व्यर्थ में छूरा दिखाकर रोज मुझको डरा रहे हैं…” सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। संचालन कर रहे अशोक तिवारी एडवोकेट ने “दोस्ती के दरमियाँ इतनी भी नादानी न हो…” प्रस्तुत किया। कवि दिवाकर द्विवेदी मेघ ने “आदमी के पास से अब जा रहा है आदमी” और प्रमुख शहीद स्थल करारी से आए प्रद्युम्न कुमार त्रिपाठी एडवोकेट ने “आदमी नहीं सोच बड़ी होती है, व्यक्तित्व के साथ तकदीर खड़ी होती है…” सुनाकर तालियां बटोरीं। सोन संगीत फाउंडेशन के सुशील मिश्रा, राकेश शरण मिश्र एडवोकेट, सोन साहित्य संगम के दयानंद दयालू, मदन चौबे, धर्मेश चौहान एडवोकेट ने विविधतापूर्ण रचनाओं से मन मोहा। सुधाकर पांडेय स्वदेशप्रेम ने वंदना के साथ देशगीत प्रस्तुत किया। हास्य कवि जयराम सोनी ने हास्य रचनाओं से खूब हंसाया। कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने “अगर किसी से दगा करोगे, तुझे मोहब्बत नहीं मिलेगी…” सुनाकर वाहवाही बटोरी। इस अवसर पर देवानंद पांडेय, जय शंकर तिवारी, धर्मेन्द्र मिश्रा, गुलाब ठाकुर कुशवाहा, विशेष अस्थाना, गोपाल बंगाली सहित कई साहित्य प्रेमी देर शाम तक जमे रहे।

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