जौहर विश्वविद्यालय के ध्वस्तीकरण पर रोक की मांग

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अल्पसंख्यक सभा सोनभद्र ने राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन, कलेक्ट्रेट पर किया विरोध प्रदर्शन

सोनभद्र । मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर के 38 भवनों को ध्वस्त किए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में अल्पसंख्यक सभा सोनभद्र ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष फारुख अली जिलानी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन संबंधित अधिकारी को सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा स्थानीय नागरिकों के भविष्य से जुड़ी है।
प्रदर्शनकारियों का मानना है कि किसी भी प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई संविधान, कानून तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए। यदि निर्माण के नक्शे या भूमि से संबंधित कोई विवाद है तो उसका समाधान विधिसम्मत प्रक्रिया से किया जाए, ताकि शिक्षा और छात्रों का अहित न हो।
हिदायतुल्ला खां
हिदायतुल्ला खां ने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देने और युवाओं का भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई थी। सत्तारूढ़ पार्टी राजनीतिक द्वेष भावना से ग्रस्त होकर इस शैक्षिक संस्थान की बिल्डिंगों को ध्वस्त करने का प्रयास कर रही है।
प्रदेश सचिव मुस्तफा रजा ने कहा कि यूनिवर्सिटी के निर्माण के समय ग्राम सींगनखेड़ा ग्राम पंचायत क्षेत्र में था। उस समय उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 के अंतर्गत निर्माण की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं थी।
जिला उपाध्यक्ष जुनैद अंसारी ने कहा कि निर्माण के समय ग्राम सींगनखेड़ा आरबी एक्ट 1958 के अंतर्गत रेगुलेटेड एरिया में भी शामिल नहीं था।
उन्होंने बताया कि 27.09.2024 को रामपुर डेवलपमेंट क्षेत्र में 62 नए राजस्व ग्राम शामिल किए गए, जिससे ग्राम सींगनखेड़ा पहली बार रामपुर विकास प्राधिकरण में शामिल हुआ। जबकि यूनिवर्सिटी का निर्माण उससे पूर्व ही पूर्ण हो चुका था।
उन्होंने आरोप लगाया कि रामपुर विकास प्राधिकरण एवं जिलाधिकारी रामपुर द्वारा अवैधानिक तरीके से शिक्षा का मजाक बनाते हुए गरीब बच्चों के हाथों से कलम छीनने का कार्य किया जा रहा है।
ज्ञापन में मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जनहित एवं छात्रहित में जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को तोड़ने का आदेश रद्द किया जाए और उचित वैधानिक कार्रवाई की जाए। उनके अनुसार यह आदेश केवल राजनीतिक द्वेष पर आधारित है और विधि विरुद्ध है।
इस अवसर पर प्रदेश सचिव नजमुद्दीन इद्रीशी, खुर्शीद आलम, विपिन कश्यप, इकराम अंसारी, राशिद, शाहिद, असलम खां, सैफ रजा, सिराज अहमद, रिजवान अहमद, नूर मोहम्मद तथा नगर अध्यक्ष सरदार परब्रह्म सिंह सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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