सोनभद्र। गुरुद्वारा साहिब रॉबर्ट्सगंज में शनिवार, को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। विशेष धार्मिक समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर गुरु घर की खुशियां प्राप्त कीं।प्रकाश पर्व के अवसर पर सरदार सतवंत सिंह संतोष द्वारा पाठ रखवाया गया। समागम के उपरांत भाई बेमुख सिंह एवं भाई प्यार सिंह कटरिया द्वारा गुरबाणी कीर्तन किया गया। वहीं सरदार पृथ्वीपाल सिंह ने संगत को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के इतिहास एवं सिख धर्म से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों की जानकारी दी।
मुख्य ग्रंथी भाई बीर सिंह ने मधुर गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से संगत को निहाल किया। उनके कीर्तन से पूरा गुरुद्वारा साहिब भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रथम प्रकाश सिख इतिहास की अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है। सिख परंपरा के अनुसार, 1604 ईस्वी में पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी ने विभिन्न गुरुओं की वाणी तथा भक्तों और संतों की पवित्र बाणी को संकलित कर आदि ग्रंथ साहिब का स्वरूप तैयार करवाया।
इसके पश्चात श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर में आदि ग्रंथ साहिब का प्रथम प्रकाश किया गया। बाबा बुड्डा जी को प्रथम ग्रंथी के रूप में सेवा सौंपी गई। आदि ग्रंथ में सिख गुरुओं के साथ विभिन्न संतों एवं भक्तों की ऐसी बाणी भी शामिल है, जो मानवता, समानता, प्रेम और सत्य का संदेश देती है।
बाद में दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह ने गुरु तेग बहादुर की बाणी को शामिल कर इसे पूर्ण स्वरूप दिया और 1708 ईस्वी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सिखों का शाश्वत गुरु घोषित किया।
समागम के उपरांत गुरु का अटूट लंगर आयोजित किया गया, जिसमें संगत ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से सरदार अजीत सिंह , सरदार देवेंद्र सिंह , सरदार प्रीतपाल सिंह , सरदार दया सिंह , सरदार अमोल सिंह , सरदार रंगीला सिंह , सरदार पारख सिंह सहित बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही।






