नवीन कुमार
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ पंचतत्व में विलीन हुए भाजपा के दिग्गज जयप्रकाश चतुर्वेदी
संघ प्रचारक से भाजपा के संगठन मंत्री और विधान परिषद सदस्य तक का सफर,
कोन/सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। भारतीय जनता पार्टी के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले वरिष्ठ नेता, पूर्व संगठन मंत्री एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य जयप्रकाश चतुर्वेदी का सोमवार को उनके पैतृक गांव चाचीकला में सोन नदी के तट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर संगठन के इस पुराने सिपाही को अंतिम सलामी दी। ओबरा के उपजिलाधिकारी रवि प्रकाश पासवान ने पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। अंतिम संस्कार के दौरान सोन नदी का तट शोकाकुल जनसमूह से भर गया। मुख्याग्नि उनके भतीजे सुशील चतुर्वेदी ने दी।
जयप्रकाश चतुर्वेदी का निधन केवल चाचीकला और जनपद के लिए ही नहीं, बल्कि भाजपा संगठन के लिए भी बड़ी क्षति माना जा रहा है। संघ प्रचारक के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले चतुर्वेदी ने संगठन को ही अपना जीवन मान लिया था। भाजपा में उन्होंने ब्रज, काशी और अवध क्षेत्र के संगठन मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2004 से 2010 तक वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी रहे।
अटल और कल्याण सिंह के दौर के भरोसेमंद संगठनकर्ता
भाजपा के पुराने दौर के नेताओं में शुमार जयप्रकाश चतुर्वेदी उन संगठनकर्ताओं में रहे, जिन्होंने पार्टी को गांव-गांव और बूथ स्तर तक मजबूत करने में लंबा समय दिया। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और संगठन के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके निकट संबंध रहे। अटल बिहारी वाजपेयी और कल्याण सिंह के दौर में पार्टी के विस्तार और संगठन को मजबूत करने की प्रक्रिया में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और राजनीतिक जीवन को लेकर चतुर्वेदी स्वयं सार्वजनिक मंच से अपने विचार व्यक्त करते रहे थे।
संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संघ प्रचारक से लेकर भाजपा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री और विधान परिषद सदस्य तक की जिम्मेदारियों के बावजूद उनका जुड़ाव कार्यकर्ताओं और अपने क्षेत्र से बना रहा। चाचीकला जैसे दूरस्थ क्षेत्र से निकलकर प्रदेश स्तर की राजनीति में पहचान बनाने वाले चतुर्वेदी को क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए भी याद किया जाता है। कोन को विकासखंड का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर उनके प्रयासों का भी उल्लेख मिलता है।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
पैतृक आवास से सोन नदी तट तक निकली अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। अंतिम यात्रा में सदर विधायक भूपेश चौबे, केंद्रीय संगठन मंत्री अरविंद नेमन, राज्य मंत्री संजीव गोंड़, सपा सांसद छोटेलाल खरवार, सपा जिलाध्यक्ष रामनिहोर यादव, पूर्व विधायक रमेश दूबे, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मवीर तिवारी , पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक मिश्रा, रमेश मिश्रा, अजीत चौबे, प्रवीण सिंह, शशांक शेखर मिश्रा, लक्ष्मी जायसवाल सहित सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता और ग्रामीण भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विभिन्न दलों के नेताओं की मौजूदगी ने जयप्रकाश चतुर्वेदी के व्यापक सामाजिक और राजनीतिक संपर्क को दर्शाया।
विकास और संगठन के लिए याद किए जाएंगे
श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों ने कहा कि चतुर्वेदी ने अपने राजनीतिक जीवन में पद से अधिक संगठन और कार्यकर्ताओं को महत्व दिया। वह क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को प्रदेश स्तर तक पहुंचाने और विकास कार्यों के लिए लगातार प्रयासरत रहे। उनके निधन को भाजपा संगठन के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए नेताओं ने कहा कि उनके जैसे समर्पित संगठनकर्ता लंबे समय तक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।
सोन नदी के तट पर अंतिम संस्कार के समय हर आंख नम थी। चिता को मुखाग्नि दिए जाने के साथ ही भाजपा के उस पुराने संगठनकर्ता की राजनीतिक यात्रा का भौतिक रूप से अंत हो गया, जिसने अपना जीवन पार्टी और संगठन के विस्तार में लगा दिया था।






