सोनभद्र के जंगलों की कीमत पर विकास का दिखावा बर्दाश्त नहीं – मृदुल मिश्रा

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युवा कांग्रेस महासचिव बोले- पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं से हजारों हेक्टेयर वन भूमि खतरे में

सोनभद्र। युवा कांग्रेस सोनभद्र के महासचिव मृदुल मिश्रा ने जिले में तेजी से बढ़ रहे वन दोहन और प्रस्तावित पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर सोनभद्र के घने जंगलों को निजी कंपनियों के हवाले कर हजारों हेक्टेयर वन भूमि समाप्त करने की तैयारी है।
मृदुल मिश्रा ने कहा कि सोनभद्र पहले से ही कोयला खन, तापीय विद्युत परियोजनाओं, सीमेंट उद्योगों और प्रदूषण का दंश झेल रहा है। इसके बावजूद ग्रीनको सहित कई बड़ी पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए वन क्षेत्रों को चिन्हित किया जा रहा है। लाखों पेड़ों की कटाई का दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब वृक्षारोपण पर हर साल हजारों करोड़ खर्च हो रहे हैं तो सोनभद्र का वन क्षेत्र लगातार क्यों घट रहा है? प्राकृतिक जंगलों को काटकर कहीं और पौधे लगाने से पर्यावरणीय क्षति की भरपाई संभव नहीं। सरकार व प्रशासन स्थानीय ग्रामीणों, आदिवासियों व वनाधिकार धारकों की चिंताओं को नजरअंदाज कर रहे हैं।
मृदुल मिश्रा ने मांग की कि सभी प्रस्तावित परियोजनाओं का स्वतंत्र पर्यावरणीय आकलन हो, वन भूमि विचलन व कटाई के दस्तावेज सार्वजनिक हों, ग्राम सभाओं की सहमति व वनाधिकार कानून का पालन हो, पिछले दस वर्षों में वन क्षेत्र के नुकसान वृक्षारोपण खर्च का श्वेत पत्र जारी हो। जब तक संतोषजनक जवाब न मिले, संवेदनशील वन क्षेत्रों में नई परियोजनाओं पर रोक लगे।

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