कथा व्यास आचार्य मनोहर कृष्ण ने कहा— एक घंटे की भक्ति से मिले भगवान, राम-भरत के प्रेम की दी मिसाल
सोनभद्र। श्री राम जानकी मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर वृंदावन से पधारे कथा व्यास आचार्य मनोहर कृष्ण महाराज ने कथा का रसपान कराया। उन्होंने सूर्यवंशी वंशावली का वर्णन करते हुए बताया कि राजा सत्यव्रत की रक्षा के लिए भगवान नारायण स्वयं मत्स्य रूप धारण कर आए। भगवान अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं।
आचार्य ने बताया कि इक्ष्वाकु वंश के प्रतापी राजा महाराज खटवांग ने मात्र एक घंटे में ही भगवान को प्राप्त कर लिया। उन्होंने कहा कि हम भी भक्ति और विश्वास से भगवान को प्राप्त कर सकते हैं, बस महाराज खटवांग की तरह श्रद्धा होनी चाहिए।
कथा में राम कथा का विस्तार से वर्णन किया गया। यज्ञ भगवान व गुरुदेव की कृपा से महाराज दशरथ के यहां चार पुत्रों का जन्म हुआ। भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। उन्होंने मर्यादा में रहकर लीला पूर्ण की। भरत को राजगद्दी देने के उद्देश्य से स्वयं 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। राम-भरत का प्रेम भाई-भाई के प्रेम की मिसाल है।
आगे माता जानकी के रावण द्वारा हरण, वानर सेना की सहायता से रावण वध का प्रसंग सुनाया। कहा कि रावण अहंकार का प्रतीक है। चंद्रवंश के प्रतापी राजाओं का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान परशुराम ने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रियों से विहीन कर अधर्म मिटाकर धर्म की स्थापना की। यदुवंश में भगवान कृष्ण का अवतार हुआ। कृष्ण जन्म का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया और सुंदर झांकी के दर्शन हुए।
इस अवसर पर डॉ. मार्कण्डेय पाठक, रमेश देव पाण्डेय, ओमप्रकाश पाठक, महेंद्र प्रसाद शुक्ला, आशुतोष पाठक, अजीत शुक्ला, प्रदीप चौरसिया, जेवी सिंह, राजेश देव पाण्डेय समेत तमाम भक्तगण मौजूद रहे।






