सोनभद्र। सोनभद्र जनपद में प्रस्तावित पम्प स्टोरेज परियोजनाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार की निष्क्रियता और उदासीन रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायालय ने पर्यावरणीय संकट और प्राकृतिक असंतुलन पर सरकार के रवैये को चिंताजनक बताया है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय एवं न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि 10.03.2026 को दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार द्वारा अब तक पर्यावरणीय स्वीकृति (एनवायरनमेंटल क्लियरेंस) से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई है, जबकि यह किसी भी ऐसी परियोजना के लिए अनिवार्य शर्त है।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आदेशों का अनुपालन न होना संबंधित अधिकारियों की गंभीर लापरवाही और उदासीनता को दर्शाता है। साथ ही, न्यायालय ने यह चिंता भी व्यक्त की कि यह स्पष्ट नहीं है कि परियोजना का कार्य प्रारंभ हो चुका है या नहीं, जिससे पर्यावरणीय और विधिक प्रश्न और भी गंभीर हो जाते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने औद्योगिक विकास आयुक्त, सिविल सचिवालय, लखनऊ को 04.05.2026 को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने पूछा है कि आधिकारिक पत्रों का उत्तर क्यों नहीं दिया गया, परियोजना की वर्तमान स्थिति क्या है और क्या पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त की गई है अथवा नहीं।
सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से अवगत कराया गया कि यह परियोजना किसी संरक्षित/नियंत्रित क्षेत्र में नहीं आती, इसलिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से अनुमति आवश्यक नहीं है। न्यायालय ने इस संबंध में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को परियोजना से संबंधित सभी कंपनियों को पक्षकार बनाने की सलाह दी। याची की अधिवक्ता अभिलाषा पांडेय ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में अडानी ग्रुप सहित 5 अन्य कंपनियों को पक्षकार बनाया जा रहा है।
गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट ने न्यायपालिका से वन्यजीव, जल, जंगल और जनजातियों पर आए संकट को दूर करने की गुहार लगाई। ट्रस्ट के अध्यक्ष रवि प्रकाश चौबे ने न्यायपालिका को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए पर्यावरण प्रेमियों, धांधरौल, नगवा और सोन पर आश्रित किसानों, जंगल के देवी-देवताओं और जनजातियों का आभार जताया। याची सत्य प्रताप सिंह ने कहा कि सोनभद्र के लोगों का मुकाबला बड़े कारपोरेट घरानों से है लेकिन अपनी विरासत नहीं मिटने देंगे।
रालोद के जिलाध्यक्ष ने हाईकोर्ट के आदेश को संवेदनशील बताया और अधिवक्ता अभिलाषा पांडेय व उनकी लीगल टीम को धन्यवाद दिया। इस अवसर पर रमेश चतुर्वेदी, गरुड़ पाण्डेय, रामसेवक खरवार, भोला पांडेय आदि मौजूद रहे। मामले की अगली सुनवाई 04 मई 2026 को निर्धारित की गई है।






