भजपाइयों ने राहुल गांधी की तस्वीर पर चप्पल से पीटा कालिख लगाई प्रकरण : कांग्रेस पार्टी का विरोध, कार्रवाई न होने पर ‘शवयात्रा’ की चेतावनी

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अमित मिश्रा

सोनभद्र। भाजपा महिला मोर्चा के प्रदर्शन पर बवाल, कांग्रेस ने कोतवाली में दी तहरीर; 22 अप्रैल को बड़े आंदोलन का ऐलान

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया जब भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा के विरोध प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तस्वीर पर कालिख पोतने और चप्पल मारने की घटना सामने आई।

इस घटना पर कांग्रेस पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया है।

कोतवाली में तहरीर, कार्रवाई की मांग

रविवार को जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने रॉबर्ट्सगंज कोतवाली पहुंचकर लिखित तहरीर दी। शिकायत में आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई।

यह तहरीर महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष ऊषा चौबे के लेटरहेड पर दी गई।

महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष उषा चौबे का बयान

कांग्रेस पार्टी की जिला महिला अध्यक्ष उषा चौबे ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तस्वीर पर कालिख पोतना और चप्पल मारना न केवल एक व्यक्ति का अपमान है, बल्कि यह हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की गरिमा पर सीधा हमला है। इस तरह की अमर्यादित राजनीति किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जा सकती।”

उन्होंने आगे कहा कि दोषियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, अन्यथा कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा आंदोलन करेगी।

कांग्रेस की चेतावनी ‘शवयात्रा’ निकालेगी पार्टी

जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामराज गोंड ने कड़े शब्दों में कहा कि इस तरह की “ओछी राजनीति” को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो 22 अप्रैल को पूरे जिले में ‘शवयात्रा’ निकालकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

उन्होंने इसे लोकतंत्र और राजनीतिक शिष्टाचार पर सीधा हमला बताया।

महिला मोर्चा पर सवाल, छात्राओं की भागीदारी पर विवाद

जिला उपाध्यक्ष संगीता श्रीवास्तव ने भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में गलत संदेश देती हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन में एक मेडिकल कॉलेज की छात्राएं गणवेश में शामिल थीं, जिसे गंभीर विषय बताते हुए संबंधित संस्थान की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

स्थानीय से राष्ट्रीय बना मुद्दा

यह मामला अब स्थानीय राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है। राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

राजनीतिक संदेश और असर

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की घटनाएं न केवल राजनीतिक संवाद को प्रभावित करती हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और सार्वजनिक विमर्श की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े करती हैं।

अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और 22 अप्रैल को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर टिकी हैं, जो इस विवाद को नई दिशा दे सकता है।

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