गायो की सुरक्षा के लिए आम नागरिक को समझनी होगी अपनी जिम्मेदारी : महेश कुमार शुक्ला

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अमित मिश्रा

प्रदेश सरकार बेघर गायों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील : महेश शुक्ला

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)।  सरकार गो वध निवारण अधिनियम 1955 के अन्तर्गत गोवंश के सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। जीरो टॉलरेंस नीतिः गोवंश संरक्षण से सम्बन्धित नियमों के उल्लंघन पर त्वरित एवं कठोर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित कि जा रही है। प्रदेश में कुछ आसामाजिक एवं निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा भ्रम फैलाए जा रहे। उक्त बातें गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कही।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी एवं कुशल नेतृत्व में उप्र सरकार ‘गौ सेवा’ को केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवीय, सामाजिक एवं आध्यात्मिक उत्तरदायित्व के रूप में स्वीकार करते हुए सतत् कार्य कर रही है। राज्य सरकार द्वारा निराश्रित एवं असहाय गोवंश के संरक्षण, संवर्धन एवं समुचित देखभाल के लिए व्यापक एवं बहु आयामी योजनाएं संचालित की जा रही है, जिनके सकारात्मक परिणाम प्रदेशभर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे है।

उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जहाँ निराश्रित गोवंश के भरण पोषण के लिए सरकार द्वारा 50 रू की दर से भरण पोषण की धनराशि उपलब्ध करायी जा रही है।

प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी गौ संरक्षण नीति के अन्तर्गत वर्तमान में राज्य के विभिन्न जनपदों में 7,700 से अधिक गो-आश्रय स्थल सक्रिय रूप से संचालित हो रहे है। इन आश्रय स्थलों में 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आवास, नियमित आहार, स्वच्छ पेयजल तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। यह व्यवस्था न केवल गोवंश के संरक्षण को सुनिश्चित कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक संतुलन को भी सुदृढ़ कर रही है।

गौशालाओं के प्रभावी संचालन एवं परदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा 5,446 गौशालाओं में 7,592 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गये हैं। अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली चौबीस घण्टे कार्यरत रहकर गोवंश की सुरक्षा, देखभाल की गुणवत्ता तथा प्रशासनिक जवाबदेही को सुनिश्चित कर रही है।

मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के माध्यम से सरकार ने गौ संरक्षण को जन आंदोलन का रूप प्रदान किया है। इस योजना के अन्तर्गत अब तक 1,67,065 गोवंश इच्छुक एवं जिम्मेदार गोपालकों को सुपुर्द किए गये हैं। सरकार द्वारा प्रत्येक गोवंश के लिए 50 रू0 प्रतिदिन की दर से पोषण भत्ता सीधे गोपालको के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से प्रेषित किया जा रहा है। यह पहल न केवल गोवंश के संरक्षण में सहायक है, बल्कि गोपालकों की आय वृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

जनपद सोनभद्र में जिला प्रशासन द्वारा गौ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में जनपद में 8 गौ-आश्रय स्थल क्रियाशील है, जिनमें 2814 गोवंश का संरक्षण एवं पालन-पोषण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 368 प्रगतिशील गोपालकों ने सहभागिता योजना के अन्तर्गत 1057 गोवंश को अपनाकर सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

पत्रकार वार्ता में उनके द्वारा बताया गया कि गोसेवा के पदाधिकारियों के द्वारा गोआश्रय स्थलों का नियमित भ्रमण करतें हुये निरन्तर पैनी निगाह रखी जा रही है और कोई भी अनियमितता प्राप्त होने पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। इस समय कतिपय वेशधारी छदमधर्म प्रचारकों के द्वारा भ्रामक सूचनायें फैलाकर जनमानस को भ्रमित करने का कुतसित प्रयास किया जा रहा है।

आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि निराश्रित की सेवा एवं संरक्षण के लिए कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। राज्य सरकार गौ वंश के प्रति अपनी संवेदनशील, मानवीय एवं समर्पित दृष्टि के साथ सुशासन के सिद्धांतो को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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