थानाध्यक्ष ने कहा- म्योरपुर की लीला है सबसे अच्छी, महिलाओं से बोले- परेशानी पर डायल करें 112, आयोजन समिति ने किया सम्मानित
म्योरपुर/सोनभद्र। म्योरपुर में चल रही रामलीला मंचन के सातवें दिन नक कटईया और सीता हरण लीला का सजीव मंचन किया गया। आयोजन समिति ने म्योरपुर थानाध्यक्ष जितेंद्र सरोज और अवर अभियंता महेश कुमार को अंगवस्त्र एवं मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया।
अपने संबोधन में थानाध्यक्ष ने कहा कि इस क्षेत्र की सबसे अच्छी लीला म्योरपुर में खेली जाती है। महिलाओं को जागरूक करते हुए कहा कि लीला देखकर घर जाते समय कोई अराजक तत्व परेशान करे तो तुरंत 112 डायल करें या थाने में सूचना दें, तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
लीला की शुरुआत पंचवटी से हुई जहां प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण कुटिया बनाकर निवास कर रहे हैं। राक्षसी शूर्पणखा दो सुकुमारों को देख मोहित हो जाती है और श्रीराम से विवाह का प्रस्ताव रखती है। प्रभु कहते हैं मेरी पत्नी साथ है, लक्ष्मण से पूछो। लक्ष्मण खुद को राम का दास बताकर विवाह से मना कर देते हैं। शूर्पणखा सुंदर रूप धारण कर मनमोहक नृत्य करती है, तभी लक्ष्मण उसके नाक-कान काट देते हैं।
कटी नाक लेकर शूर्पणखा खर-दूषण के पास जाती है। दोनों पंचवटी में राम से युद्ध कर वीरगति को प्राप्त होते हैं। इसके बाद शूर्पणखा रावण दरबार जाकर आपबीती सुनाती है। रावण मामा मारीच के पास जाता है और सोने का मृग बनकर पंचवटी जाने को कहता है। मृग को देख सीता जी राम से उसे लाने को कहती हैं। राम लक्ष्मण को कुटिया की रक्षा का जिम्मा देकर मृग के पीछे जाते हैं। देर होने पर सीता लक्ष्मण को भेजती हैं। लक्ष्मण रेखा खींचकर माता से पार न करने को कहते हैं।
रावण साधु वेश में आकर भिक्षा मांगता है। सीता के बाहर आते ही रावण पुष्पक विमान से हरण कर लंका ले जाता है। जटायु युद्ध करता है तो रावण उसके पंख काट देता है। सीता अपना कुंडल नीचे फेंक देती हैं। भगवान के सजीव दर्शन कर लीला प्रेमी भाव-विभोर हो गए।









