आस्था का महासंगम: माता जिरही देवी धाम पर उमड़ा जनसैलाब, आदिवासी परंपराओं की अद्भुत छटा

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अरविन्द दुबे

चोपन (सोनभद्र)। जनपद के चोपन विकासखंड स्थित जुगैल ग्राम पंचायत में विराजमान माता जिरही देवी का धाम इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर आस्था और श्रद्धा का केंद्र बन गया है। चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर यहां भक्तों का ऐसा सैलाब उमड़ रहा है, मानो पूरी आस्था एक ही धाम में सिमट आई हो। दूर-दराज के इलाकों से हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और “जय माता दी” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा है।

सोनभद्र के जुगैल ग्राम पंचायत में स्थित माता जिरही देवी का यह प्राचीन धाम न केवल धार्मिक बल्कि आदिवासी सांस्कृतिक विरासत का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। चैत्र नवरात्र के दौरान यहां सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जहां हर भक्त पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ माता के दरबार में हाजिरी लगा रहा है।

इस धाम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जनजातीय परंपराएं हैं। स्थानीय आदिवासी समुदाय माता जिरही देवी को अपनी इष्ट देवी मानकर पारंपरिक रीति-रिवाजों से पूजा-अर्चना करता है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी के अवसर पर यहां विशेष अनुष्ठान आयोजित होते हैं, जिनमें पारंपरिक नृत्य, पूजा और अनोखी आस्था की झलक देखने को मिलती है। महिलाएं सिर पर कलश लेकर माता के धाम तक पहुंचती हैं, तो वहीं कई श्रद्धालु कठिन तप और विशेष अनुष्ठानों के माध्यम से अपनी भक्ति प्रकट करते हैं, जो इस धाम को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाता है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। मंदिर परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर तैनात है। ग्राम पंचायत द्वारा भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, जिससे दर्शन-पूजन सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

माता जिरही देवी का यह धाम आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और आदिवासी परंपराओं का जीवंत संगम बन चुका है, जहां हर भक्त अपनी श्रद्धा के साथ नतमस्तक हो रहा है।

दिनेश यादव (स्थानीय प्रधान प्रतिनिधि)बताते है की “नवरात्र में यहां हर साल हजारों श्रद्धालु आते हैं। इस बार भी व्यवस्था बेहतर की गई है, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो और सभी श्रद्धालु आसानी से माता के दर्शन कर सकें।”

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