सेवानिवृत्त शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन, पेंशन वैधता अधिनियम के खिलाफ आक्रोश

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  सोनभद्र -। बेसिक शिक्षा के सेवानिवृत्त शिक्षकों के एकमात्र संगठन उत्तर प्रदेशीय सेवा निवृत्त प्राथमिक शिक्षक कल्याण परिषद ने केंद्र सरकार के केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम, 2025 के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। परिषद की जनपद शाखा सोनभद्र ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजते हुए इस अधिनियम को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
परिषद के अध्यक्ष बैजनाथ देव और संघर्ष समिति अध्यक्ष रविन्द्र नाथ द्विवेदी के नेतृत्व में पेंशनरों ने आरोप लगाया कि यह अधिनियम पेंशनर्स के बीच भेदभाव पैदा करता है। उनका कहना है कि नए नियमों के तहत सेवानिवृत्ति की तिथि को आधार बनाकर पेंशन तय की जाएगी, जिससे पुराने पेंशनरों को वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ नहीं मिल पाएगा।
पेंशनरों का कहना है कि इससे हजारों बुजुर्गों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और उनकी सामाजिक सुरक्षा पर भी असर पड़ेगा। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले डी.एस. नाकरा बनाम भारत संघ (1983) की भावना के विपरीत है, जिसमें पेंशन को सामाजिक सुरक्षा का अहम अधिकार बताया गया था।
परिषद ने बताया कि ऑल इंडिया स्टेट पेंशनर्स फेडरेशन के आह्वान पर 25 मार्च 2026 को ‘विरोध दिवस’ मनाया गया, जिसके तहत सोनभद्र में भी पेंशनरों ने विरोध दर्ज कराया और सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास किया।
प्रदर्शन में दीप नारायण, जंग बहादुर सिंह, कृष्ण सेवक शुक्ला, शिव कुमार, रामचरन देव पांडेय, शिव कुमारी, जगदम्बा देवी, दुर्गावती, चंद्रावती, श्यामदुलारी, रामकली, बलराम सिंह, जगदीश यादव, हीरा प्रसाद सहित कई सेवानिवृत्त शिक्षक शामिल रहे।

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