“चिरकुट सलाहकारों के घेरे में सियासत?” – अखिलेश पर तीखा हमला, भाजपा में आने का दिया ऑफर

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रवि पाण्डेय

O- “गलत बयान देंगे तो ‘सठे-साठे समाचरे’ होगा” – अखिलेश को चेतावनी

O- सभी ब्राह्मण विधायक भाजपा पार्टी के कार्यकर्ता हैं।

सोनभद्र। देश की राजनीति में बयानबाज़ी का स्तर एक बार फिर चर्चा में है। विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए एक भाजपा विधायक भूपेश चौबे ने अखिलेश यादव के हालिया बयानों को लेकर तीखी टिप्पणी की और कहा कि उनके आसपास “चिरकुट टाइप” के लोग है और चिरकुट तरह के सलाह देने वालों का मानो पूरा खजाना जमा हो गया है, जिसके कारण वह अक्सर बचकाने चिरकुट टाइप का बयान बयान देते हैं।

भाजपा विधायक भूपेश चौबे ने तंज कसते हुए कहा, “हम का बताइए उनके के देवला विचार… इतना बड़ा परिवार के लड़का बायन, सुनी-ला बड़ा विदेश-उदेश पढ़ के आयल बायन और मुख्यमंत्री भी रहल बायन। लेकिन हमके त लागत बा कि सब जितना चिरकुट टाइप का लोग बायन, उनके पास चिरकुट्टन के खजाना हो गयल बा। चिरकुट टाइप के सलाह देते बायन, चिरकुट टाइप के सलाह सुनकर चिरकुट टाइप के बायन दे बायन, बचकाना बायन देते बायन। हर समय ऐसे-ऐसे करत रहलन, ऐसे चिरकुट टाइप के लोगन क खजाना हो गयल बा।”

भाजपा विधायक भूपेश चौबे

कटाक्ष यहीं नहीं रुका। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में भारतीय जनता पार्टी की ओर से अखिलेश यादव को ऑफर देते हुए कहा कि “अगर वे चाहें तो अपनी पार्टी समाजवादी पार्टी के साथ भाजपा में शामिल हो जाएं। उनका कहना था कि कम से कम इससे वे राष्ट्रवाद की मुख्यधारा से जुड़ जाएंगे”।

नेता ने आगे कहा, जिसकी जितनी क्षमता है, उतना अवसर भाजपा में मिलता है। हमारे कार्यकर्ता अजेय हैं। वो कहीं के कोई ‘लॉर्ड गवर्नर’ नही है, लेकिन काम करने वालों के लिए जगह जरूर है।

बयान के दौरान उन्होंने नाथ परंपरा और सनातन व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारतीय सांस्कृतिक व्यवस्था की मूल संपदा है और उस पर टिप्पणी करना पूरे संत समाज का अपमान माना जाएगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अखिलेश यादव इस विषय पर गलत टिप्पणी कर रहे है यह गलत बात है उनके साथ भी “सठे साठे समाचरे” की तर्ज पर उसी भाषा में जवाब भी मिलेगा।

नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा में सभी वर्गों को समान महत्व है और पार्टी के ब्राह्मण विधायक भी संगठन के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि सभी ब्राह्मण विधायक भाजपा पार्टी के कार्यकर्ता हैं।

पार्टी नेतृत्व और हमारे नेता नरेंद्र मोदी, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्या है, जिनके मार्गदर्शन में कार्यकर्ता काम कर रहे हैं।

राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और कटाक्ष कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश की राजनीति में संवाद की जगह अब व्यंग्य और तीखे तंज ने ले ली है।

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