प्राथमिक विद्यालयों की बंदी के खिलाफ युवा मंच का अभियान, कहा, दलित – आदिवासी बच्चों से छीनी जा रही शिक्षा

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अमित मिश्रा

म्योरपुर (सोनभद्र) । उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 50 से कम नामांकित बच्चों वाले प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने के निर्णय के खिलाफ युवा मंच ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को युवा मंच की टीम ने डडियरा, बलियरी, खैराही, किरवानी और गोविंदपुर आश्रम सहित कई गांवों का दौरा कर स्थानीय लोगों से संवाद किया और विद्यालयों की स्थिति का जायजा लिया।

टीम ने पाया कि इन विद्यालयों की बंदी से सबसे अधिक असर गरीब, दलित और आदिवासी समुदाय के बच्चों पर पड़ रहा है, जिन्हें अब लंबी दूरी पैदल तय करके अन्य स्कूलों में जाना होगा। अभिभावकों ने टीम को बताया कि छोटे-छोटे बच्चों के लिए इतनी दूर पैदल जाना व्यावहारिक नहीं है, जिससे उनकी नियमित शिक्षा प्रभावित होगी और बहुत से बच्चे स्कूल ही छोड़ देंगे।

युवा मंच की टीम ने सरकार के इस निर्णय को “तुगलकी फरमान” करार देते हुए कहा कि यह संविधान प्रदत्त शिक्षा के अधिकार और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। टीम ने हाई कोर्ट लखनऊ बेंच के उस आदेश की भी याद दिलाई जिसमें कहा गया है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न हो और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके

टीम ने कहा कि पहले से ही दुद्धी जैसे पहाड़ी-पठारी क्षेत्र में शिक्षा की स्थिति चिंताजनक है। कक्षा 8 के बाद बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं और लड़कियों को उच्च शिक्षा व सरकारी नौकरी के सपने साकार करने के लिए कोई ठोस अवसर नहीं मिल रहा है। अब यदि प्राथमिक शिक्षा के केंद्र भी बंद कर दिए जाते हैं, तो यह शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर देगा।

युवा मंच ने ऐलान किया है कि इस फैसले के खिलाफ बड़े पैमाने पर जनसमर्थन जुटाते हुए हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा और जल्द ही जिलाधिकारी से मिलकर ज्ञापन सौंपा जाएगा।
इस अभियान का नेतृत्व जिला संयोजक सविता गोंड और जिलाध्यक्ष रूबी सिंह गोंड ने किया। उनके साथ ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के जिला संयोजक कृपा शंकर पनिका और मजदूर किसान मंच के नेता रामविचार गोंड भी अभियान में शामिल रहे।

युवा मंच ने सरकार से मांग की है कि वह अपने फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करे और विद्यालयों की बंदी का आदेश रद्द कर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखे।

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