अमित मिश्रा
सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। भारतीय संस्कृति,अध्यात्म,सभ्यता और इतिहास से विश्व को अपनी ओजस्वी वाणी से परिचय कराने वाले, युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर जनपद में नगर पालिका परिषद के विवेकानंद प्रेक्षागृह स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनको नमन किया गया।
मुख्य अतिथि भाजपा जिला महामंत्री कृष्ण मुरारी गुप्ता ने बताया कि स्वामी विवेकानंद को आधुनिक भारत के आध्यात्मिक पुनर्जागरण का प्रणेता माना जाता है। वह न केवल अपनी गहन शिक्षाओं और वैश्विक दृष्टिकोण के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि उनकी आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और जीवन के प्रति उनकी असाधारण समझ भी उन्हें संत की श्रेणी में खड़ा करती है। आज स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि है। एक ऐसा प्रश्न जो उनके जीवन के बारे में अक्सर उठता है, वह यह है कि क्या उन्हें अपनी मृत्यु का पूर्वाभास था। उनके जीवन के अध्ययन और उनके शिष्यों द्वारा कही गई बातों से यह साफ होता है कि स्वामी विवेकानंद को अपनी मृत्यु का पूर्वाभास था।
श्री गुप्ता ने बताया कि सिर्फ 39 साल की उम्र में त्याग दी थी देह
4 जुलाई 1902 को जब स्वामी विवेकानंद का निधन हुआ, उस समय उनकी उम्र मात्र 39 वर्ष थी। उनके शिष्यों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, उस दिन उन्होंने सामान्य से ज्यादा समय तक ध्यान और साधना की। वे शांत, संतुष्ट और आत्मिक रूप से बहुत पूर्ण लग रहे थे। कुछ लोगों ने कहा कि उन्होंने ‘महासमाधि’ की अवस्था में शरीर त्यागा, जो एक योगी की सचेतन रूप से देह छोड़ने की अवस्था है। स्वामी विवेकानंद ने सिर्फ 39 साल की उम्र में वह सब हासिल कर लिया था, जिसे अधिकांश लोग अपनी पूरी उम्र में नहीं हासिल कर पाते। उन्होंने भारत को आध्यात्मिक रूप से जगाने का जो सपना देखा था, वह तबसे लगातार आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर वरिष्ठ नेता संजय श्रीवास्तव ,भाजयुमो क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी विपिन तिवारी ,जिला कोषाध्यक्ष आशीष केसरी , सभासद विनोद सोनी ,नगर उपाध्यक्ष व पूर्व सभासद अभिषेक गुप्ता पूर्व सभासद राजन गुप्ता व अमन वर्मा ,रिशू केसरी आदि अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।






