पास्को एक्ट के दोषी को सात वर्ष की कठोर सजा

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राजेश कुमार पाठक

20 हजार रूपये अर्थदंड, न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी ।

जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी।

अर्थदंड की धनराशि में से 15 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी

साढ़े 5 वर्ष पूर्व नाबालिग छात्रा के अपहरण का मामला

    सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। जनपद में साढ़े 5 वर्ष पूर्व नाबालिग छात्रा के अपहरण के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने शनिवार को सुनवाई करते हुए दोष सिद्ध पाकर दोषी अजय कुमार उर्फ गोल्डी को 7 वर्ष की कठोर कैद एवं 20 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित की जाएगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि में से 15 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी।

    अभियोजन पक्ष के मुताबिक शक्तिनगर थाना क्षेत्र स्थित एक गांव निवासी पीड़िता के पिता ने शक्तिनगर थाने में 18 अक्तूबर 2019 को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि उसकी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी 17 अक्तूबर 2019 को दोपहर बाद 3:50 बजे ट्यूशन पढ़ने गई थी, लेकिन वह घर वापस नहीं लौटी तो ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षक के यहां पता करने गया तो पता चला कि वह ट्यूशन पढ़ने गई ही नहीं थी। यह भी पता चला की बेटी को बहला फुसलाकर अजय कुमार उर्फ गोल्डी पुत्र रामफल निवासी अम्बेडकर नगर, थाना शक्तिनगर जिला सोनभद्र भगा ले गया है। बेटी को हर संभावित जगह पर तलाश किया, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला, तब सूचना दे रहा हूं। आवश्यक कर्रवाई करें। इस तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दिया और पर्याप्त सबूत मिलने पर कोर्ट में अजय समेत चार लोगों के विरूद्ध चार्जशीट विवेचक ने दाखिल किया था।

    मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्को को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी अजय कुमार उर्फ गोल्डी को 7 वर्ष की कठोर कैद एवं 20 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वही अर्थदंड की धनराशि में से 15 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी। बता दें कि इस मामले में 29 मई को दो दोषियों को सजा सुनाई गई है जिन्हें न्यायिक हिरासत में लेकर जिला कारागार भेज दिया गया है। अजय कुमार उर्फ गोल्डी को दोषसिद्ध किया गया था, लेकिन कोर्ट के समक्ष हाजिर न आने की वजह से गैर जमानती वारंट जारी किया गया था।

    अभियोजन पक्ष की ओर ले सरकारी वकील दिनेश कुमार अग्रहरि, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और नीरज कुमार सिंह ने बहस की।

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