सोनभद्र में विकास कार्यों की रफ्तार थमी, डीएमएफ फंड का नहीं हो रहा सही उपयोग

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विष्णु अग्रहरी

भाजपा नेता सुरेन्द्र अग्रहरि ने जिलाधिकारी से तत्काल कार्रवाई की मांग की

दुद्धी (सोनभद्र) । उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जनपद चार राज्यों की सीमाओं से घिरा एक रणनीतिक और औद्योगिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां कई पावर प्लांट, खदानें और कल-कारखाने स्थित हैं, जो राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय योगदान देते हैं। इसी क्षेत्रीय विकास को गति देने हेतु केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड (डीएमएफ) का उद्देश्य स्थानीय नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, रोजगार, स्किल डेवलपमेंट, पेयजल और मनोरंजन जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान करना है।

हालांकि, वास्तविकता इससे उलट है। जिले में डीएमएफ फंड का समयबद्ध और प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिससे विकास कार्यों में गंभीर विलंब हो रहा है। कई बार जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठकें आयोजित की गईं, लेकिन अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण इन योजनाओं को ज़मीनी हकीकत नहीं मिल पाई।

जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तावित विकास कार्यों की लगातार अनदेखी की जा रही है। सांसद और विधायक जब क्षेत्रीय दौरों पर जाते हैं, तो जनता की ओर से मूलभूत आवश्यकताओं की मांग उठाई जाती है। आश्वासन दिए जाते हैं, प्रस्ताव मांगे जाते हैं — परंतु वर्षों बीत जाने पर भी कार्य प्रारंभ नहीं हो पाता, जिससे जनता में विश्वास की कमी आने लगती है।

भाजपा नेता सुरेन्द्र अग्रहरि ने इस मुद्दे को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा, “अगर जिलाधिकारी मनोयोग से कार्य करें तो डीएमएफ फंड का सही उपयोग संभव है और चतुर्दिक विकास हो सकता है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि इस फंड में करोड़ों रुपये बिना उपयोग के पड़े हुए हैं, जो जनपद के विकास में उपयोग किए जा सकते हैं। अग्रहरि ने जिलाधिकारी से अपील की है कि वे अधीनस्थ अधिकारियों को सख्त निर्देश दें और निष्क्रियता को तत्काल समाप्त करें।

जनता से किए गए वादे और जनप्रतिनिधियों के विश्वास को कायम रखने के लिए आवश्यक है कि डीएमएफ फंड से जुड़ी योजनाओं को शीघ्रता से कार्यान्वित किया जाए, जिससे सोनभद्र वास्तविक रूप में “ऊर्जांचल” कहलाने के योग्य बन सके।

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