अमित मिश्रा
O- मासूमों के गायब होने की बढ़ती घटनाएं: आखिर बच्चों को कौन और क्यों बना रहा निशाना?
चोपन (सोनभद्र) । देशभर में लगातार बढ़ रही बच्चों के गायब होने की घटनाओं ने समाज और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। कहीं मासूमों को बहला-फुसलाकर ले जाया जा रहा है, तो कहीं मानव तस्करी, अवैध मजदूरी, भीख मंगवाने वाले गिरोह, अवैध गोद लेने के नेटवर्क और यहां तक कि मेडिकल परीक्षण या अंग तस्करी जैसे गंभीर संदेह भी खड़े हो रहे हैं। ऐसे भयावह माहौल के बीच सोनभद्र की चोपन पुलिस ने सराहनीय कार्य करते हुए तीन नाबालिग बच्चों को सकुशल बरामद कर चाइल्ड हेल्प लाइन टीम को सौंप दिया।
जनपद में पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन, क्षेत्राधिकारी रणधीर मिश्रा के कुशल पर्यवेक्षण तथा थाना प्रभारी निरीक्षक चोपन अखिलेश मिश्रा के नेतृत्व में चोपन पुलिस ने सराहनीय कार्रवाई करते हुए तीनों मासूम बच्चों को सुरक्षित संरक्षण प्रदान कर चाइल्ड हेल्प लाइन टीम को सुपुर्द किया।
जानकारी के अनुसार डायल 1098 के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि तेलगुड़वा क्षेत्र में तीन नाबालिग बच्चे बिना किसी अभिभावक के घूम रहे हैं। सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक थाना चोपन अपनी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बच्चों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया।
पूछताछ में बच्चों ने अपने नाम कैरा (08 वर्ष), टेम्पू (05 वर्ष) और कल्लू (06 वर्ष) पुत्र शिवकुमार बताए, लेकिन वे अपना सही पता नहीं बता सके। पुलिस टीम ने आसपास के गांवों में बच्चों की पहचान कराने का प्रयास किया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
इसके बाद थाना चोपन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चाइल्ड हेल्प लाइन सोनभद्र को सूचना दी। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों बच्चों को सकुशल चाइल्ड हेल्प लाइन टीम के सुपुर्द कर दिया गया।
बच्चों के गायब होने के पीछे क्या हैं बड़े कारण?
देशभर में विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों द्वारा कई गंभीर पहलुओं पर चिंता जताई जा रही है,
- बच्चों को बहला-फुसलाकर मानव तस्करी में धकेलना
- बाल मजदूरी और भीख मंगवाने वाले गिरोह
- अवैध गोद लेने के रैकेट
- सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग के जरिए बच्चों को फंसाना
- मानसिक रूप से कमजोर या गरीब परिवारों के बच्चों को निशाना बनाना
- मेडिकल परीक्षण और अंग तस्करी जैसे गंभीर संदेह
हालांकि इन मामलों की पुष्टि जांच एजेंसियां ही करती हैं, लेकिन लगातार बढ़ती घटनाएं समाज के लिए बड़ा चेतावनी संकेत बन चुकी हैं।
पुलिस की सतर्कता बनी बच्चों की सुरक्षा कवच
चोपन पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने यह साबित किया कि यदि सूचना मिलते ही संवेदनशीलता और तत्परता दिखाई जाए तो कई मासूमों को बड़े अपराधों का शिकार होने से बचाया जा सकता है। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस के इस मानवीय कार्य की सराहना की है।
समाज को भी रहना होगा सतर्क
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में कोई बच्चा अकेला, डरा-सहमा या संदिग्ध परिस्थिति में दिखाई दे तो तुरंत पुलिस, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन या प्रशासन को सूचना देनी चाहिए। एक छोटी सतर्कता किसी मासूम की जिंदगी बचा सकती है।






