सोनभद्र। जिले भर में सुहागिन महिलाओं ने सोमवार को हरितालिका तीज व्रत रखकर शिवालयों में पूजन-अर्चन किया और पति की दीर्घायु की कामना की। सुबह से ही मंदिरों में महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई।

आचार्य सौरभ कुमार भारद्वाज ने बताया कि हरितालिका तीज का व्रत भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। यह व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है, इसकी महिमा स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती को बताई थी। उन्होंने बताया कि इस व्रत में कथा का विशेष महत्व है। कथा का आरंभ करने से पहले भगवान शंकर और माता पार्वती को नमस्कार करना चाहिए। कथा के अनुसार एक बार कैलाश पर्वत पर भगवान शंकर से माता पार्वती ने पूछा – हे महेश्वर! मुझे वह गुप्त से गुप्त बात कहिए जो सब धर्मों से सरल और महान फल देने वाली हो। आपको मैंने किस व्रत, तप या दान से वर रूप में प्राप्त किया?इस पर भगवान शंकर ने कहा – हे देवी! मैं उस परम गुप्त व्रत को कहता हूं। जैसे तारागण में चंद्रमा, ग्रहों में सूर्य, वर्णों में ब्राह्मण, देवताओं में गंगा श्रेष्ठ है, वैसे ही यह व्रत श्रेष्ठ है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की हस्त नक्षत्र युक्त तृतीया के दिन इस व्रत के अनुष्ठान मात्र से सब पापों का नाश हो जाता है। तुमने पहले हिमालय पर्वत पर इस महान व्रत को किया था, जिसके प्रभाव से तुम्हें मेरा आधा आसन प्राप्त हुआ है।






