आत्म-शुद्धि और आत्म-चिंतन का पर्व है पर्यूषण : जैन श्रावक

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जैन साधना भवन में पर्यूषण पर्व का द्वितीय दिवस, दिल्ली से आए श्रावक ने किया कल्पसूत्र वाचन

सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज स्थित जैन साधना भवन में बुधवार से प्रारंभ पर्यूषण पर्व के द्वितीय दिन दिल्ली से पधारे जैन श्रावक बंधु द्वारा कल्पसूत्र का वाचन किया गया।
पर्यूषण पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पर्यूषण जैन धर्म में आत्म-चिंतन का पर्व है। यह वर्ष भर में किए गए कार्यों की आत्म-समीक्षा का पर्व है। यह बाहर से प्रकाशित होने वाला पर्व न होकर अंतरात्मा को प्रकाशित करने वाला पर्व है। इस पर्व में जप, तप, उपवास के माध्यम से व्यक्ति वर्ष भर में किए गए गलत कार्यों से मुक्ति का मार्ग खोजता है।
बताया गया कि जैन साधना भवन में प्रातः 6 बजे से शाम 6 बजे तक निरंतर जाप का कार्यक्रम चल रहा है। इस दौरान जैन बंधु अधिक से अधिक जप-तप करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में मंगल पाठ एवं प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर अध्यक्ष सुबोध अग्रवाल, धर्मराज जैन, पवन जैन, मनोज जैन, प्रशांत जैन, संजय जैन, रोहित जैन सहित बड़ी संख्या में माताएं-बहनें उपस्थित रहीं।

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