विंध्य क्षेत्र को मिलेगा नया हाई-स्पीड कॉरिडोर, 330 किमी लंबे एक्सप्रेसवे का फील्ड सर्वे शुरू

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अमित मिश्रा

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) । सड़क कनेक्टिविटी को नई गति देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए मैदानी सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ हो गया है। यह एक्सप्रेसवे वाराणसी और प्रयागराज को विंध्य और सोनांचल क्षेत्र से जोड़ने का माध्यम बनेगा।

करीब 330 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के सर्वे की जिम्मेदारी चेन्नई स्थित अल्मोंडज कंपनी को सौंपी गई है। कंपनी की तकनीकी टीम बीते कई दिनों से सोनभद्र जनपद के म्योरपुर अंचल में रूट का भौतिक और तकनीकी आकलन कर रही है।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा सोनांचल

प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे का मार्ग वाराणसी और चंदौली से होते हुए सोनभद्र को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। इसके पूर्ण होने पर विंध्य और सीमावर्ती इलाकों से प्रदेश के अन्य हिस्सों और पड़ोसी राज्यों तक आवागमन कहीं अधिक आसान हो जाएगा।

2027 से पहले निर्माण की संभावना

सर्वे पूरा होने के बाद इस माह के अंत तक परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) शासन को सौंपे जाने की तैयारी है। डीपीआर स्वीकृत होने के बाद वर्ष 2027 से पहले निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

महाकुंभ समापन पर हुई थी घोषणा

गौरतलब है कि इस एक्सप्रेसवे की घोषणा पिछले वर्ष महाकुंभ मेला के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश की छत्तीसगढ़, झारखंड और अन्य राज्यों से सीधी और तेज कनेक्टिविटी को मजबूत करना है।

जंगलों और दुर्गम इलाकों से गुजरेगा मार्ग

सर्वे टीम ने बताया कि यह एक्सप्रेसवे वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग के समानांतर विकसित होगा। रनटोला और मुर्धवा के जंगलों से गुजरते हुए यह दुद्धी-हाथीनाला मार्ग को पार करेगा और कोन क्षेत्र के रास्ते आगे बढ़ेगा। सोन नदी पर नए पुल के निर्माण की भी योजना प्रस्तावित है।

तकनीकी सर्वे में आधुनिक उपकरणों का उपयोग

कंपनी के साइट इंचार्ज अरुण यादव के अनुसार, पूरे रूट का सर्वे सैटेलाइट कनेक्टिविटी वाले उपकरणों की मदद से किया जा रहा है। हर 20 किलोमीटर पर डेटा कलेक्शन पॉइंट बनाए गए हैं, जिससे पूरे कॉरिडोर का सटीक नक्शा तैयार किया जा सके।

सोनभद्र को मिलेगा विकास का नया रास्ता

एक्सप्रेसवे के निर्माण से प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे सोनभद्र जिले को आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास की नई संभावनाएं मिलेंगी। साथ ही, यात्रियों के समय और लागत दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी।

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