दुष्कर्म के दोषी को बीस वर्ष की कठोर सजा

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राजेश कुमार पाठक

56 हजार रूपये अर्थदंड, न देने पर 2 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी

अर्थदंड की धनराशि में से 40 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी

करीब साढ़े 7 वर्ष पूर्व 16 वर्ष की दलित नाबालिग किशोरी के साथ जंगल मे ले जाकर जबरन दुष्कर्म किए जाने का मामला

    सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। जनपद में करीब साढ़े 7 वर्ष पूर्व 16 वर्ष की दलित नाबालिग किशोरी के साथ जंगल मे ले जाकर जबरन दुष्कर्म किए जाने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी राज पांडेय उर्फ राजा को 20 बर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। उसके ऊपर 56 हजार रूपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर 2 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित होगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि में से 40 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी।


    अभियोजन पक्ष के मुताबिक रॉबर्ट्सगंज थाना क्षेत्र निवासी पीड़िता की मां ने 25 अक्तूबर 2018 को रॉबर्ट्सगंज थाने में दी तहरीर में अवगत कराया था कि 23 अगस्त 2018 को शाम 4 बजे उसकी 16 वर्षीय नाबालिग बेटी को पूर्व परिचित राज पांडेय उर्फ राजा उर्फ राजा मिश्रा पुत्र स्वर्गीय अरुण कुमार मिश्रा उर्फ बच्चा निवासी रजधन, पइका, थाना चोपन, जिला सोनभद्र बहला फुसलाकर बाइक से चुर्क जंगल में ले जाकर जबरन दुष्कर्म किया। उसके बाद बेटी को मारपीट कर जाति सूचक शब्दों से गाली देकर कहीं शिकायत करने पर जान मारने की धमकी भी दिया।

    इस तहरीर पर रॉबर्ट्सगंज कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दिया। विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने कोर्ट में दुष्कर्म, एससी/एसटी एक्ट व पॉक्सो एक्ट में चार्जशीट दाखिल किया था।


    मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्को को सुनने, 9 गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दुष्कर्म के दोषी राज पांडेय उर्फ राजा (30) वर्ष को बीस वर्ष का कठोर कारावास एवं 56 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 2 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित होगी। वही अर्थदंड की धनराशि में से 40 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी।

    अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि, सत्यप्रकाश त्रिपाठी व नीरज कुमार सिंह ने बहस की।

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