आज का ज्योतिष पंचांग

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

आचार्य सुशील तिवारी

O- काशी मानक समयानुसार | 04 फरवरी 2026, बुधवार

काशी। सनातन परंपरा, वैदिक ज्योतिष और जीवनोपयोगी समाधानों को समेटे आज का पंचांग न केवल तिथि–नक्षत्र की जानकारी देता है, बल्कि मानव जीवन के व्यवहार, मानसिक शांति और समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करता है। देश के प्रख्यात ज्योतिषाचार्यों व वैदिक स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत यह पंचांग पाठकों के लिए दिशा–दर्शक सिद्ध होगा।

आज का वैदिक पंचांग

  • दिनांक: 04 फरवरी 2026, बुधवार
  • विक्रम संवत्: 2082
  • अयन: उत्तरायण
  • ऋतु: शिशिर
  • मास: फाल्गुन
  • पक्ष: कृष्ण
  • तिथि: तृतीया (रात्रि 12:09 बजे तक), तत्पश्चात् चतुर्थी
  • नक्षत्र: पूर्वाफाल्गुनी (रात्रि 10:12 बजे तक), तत्पश्चात् उत्तराफाल्गुनी
  • योग: अतिगण्ड (रात्रि 01:05 बजे तक), तत्पश्चात् सुकर्मा
  • दिशा शूल: उत्तर
  • राहुकाल: दोपहर 12:41 से 02:05 तक
  • सूर्योदय: 07:06
  • सूर्यास्त: 06:16
  • ब्रह्ममुहूर्त: प्रातः 05:23 से 06:14
    (समस्त समय काशी/उज्जैन मानक अनुसार)

शास्त्रीय विशेष

धर्मग्रंथों के अनुसार तृतीया तिथि को परवल का सेवन वर्जित माना गया है, इससे शत्रु-वृद्धि का योग बनता है। संयम और सात्त्विक आहार आज विशेष फलदायी रहेगा।

स्वभाव परिवर्तन का ज्योतिषीय उपाय

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार स्वभाव भी ग्रहों के प्रभाव से संचालित होता है,

  • कठोर स्वभाव हो तो प्रतिदिन कमल पुष्प का ध्यान करें।
  • चंचल मन के लिए “मैं शांत आत्मा हूँ” का निरंतर चिंतन करें।
    कुछ ही दिनों में मानसिक संतुलन और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव होगा।

पतन से उत्थान का मार्ग

शास्त्रों में बताया गया है कि नियमित रूप से

  • ॐ का 10–15 मिनट उच्चारण,
  • गुरुगीता पाठ,
  • तथा ईश्वर से आंतरिक संवाद
    मनुष्य को पतन से निकालकर मंगल पथ पर अग्रसर करता है। कोई भी व्यक्ति निराशा की स्थिति से बाहर आ सकता है।

लक्ष्मीप्राप्ति व गृह-शांति का सरल उपाय

  • प्रतिदिन तुलसी गमले की एक प्रदक्षिणा
  • तुलसी जल के समक्ष भगवद्गीता पाठ
  • परिवार सहित भगवन्नाम कीर्तन
    इन उपायों से गृहकलह शांत होता है और घर में सुख–समृद्धि का वास होता है।

हृदय स्वास्थ्य हेतु वैदिक पेय

रात में भिगोए 4 बादाम, सुबह 10 तुलसी पत्र व 4 काली मिर्च के साथ पीसकर आधे कप पानी में सेवन करने से हृदय, मस्तिष्क और रक्त-संचार में लाभ मिलता है।

निष्कर्ष

आज का पंचांग केवल तिथि–मुहूर्त नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, शांत और समृद्ध बनाने का वैदिक मार्गदर्शन है। यही कारण है कि राष्ट्रीय स्तर पर ज्योतिष-पंचांग आज भी समाज का मार्गदर्शक बना हुआ है।

IMG 20260928 WA0019
IMG 20260928 WA0020

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1547
वोट करें

भारत की राजधानी क्या है?