धर्म परिवर्तन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: SC दर्जे पर बड़ा फैसला, देशभर में बहस तेज़

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

न्यूज़ एक्सप्रेस डेस्क

नई दिल्ली। देश में आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है, जब सुप्रीम कोर्ट की एक अहम टिप्पणी ने अनुसूचित जाति (SC) दर्जे को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

जस्टिस पी.के. मिश्रा और एन.वी. अंजारी की बेंच ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से अलग किसी अन्य धर्म को अपनाता है, वह अनुसूचित जाति के दायरे में नहीं रहेगा।

कोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति का SC दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है, क्योंकि संविधान के तहत अनुसूचित जाति की परिभाषा विशेष धार्मिक संदर्भ में निर्धारित की गई है।

क्या है मामला और इसका असर?

कोर्ट की इस टिप्पणी का सीधा असर उन मामलों पर पड़ सकता है, जहां धर्म परिवर्तन के बाद भी SC दर्जे और उससे जुड़े लाभों का दावा किया जाता है।

साथ ही, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि अन्य धर्मों, जैसे ईसाई या इस्लाम, को अपनाने के बाद व्यक्ति SC/ST (अत्याचार निवारण) कानून के तहत मिलने वाले कुछ विशेष संरक्षण का लाभ नहीं ले सकेगा।

देशभर में बहस तेज

इस फैसले/टिप्पणी के बाद देशभर में सामाजिक, कानूनी और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
एक ओर इसे संविधान की मौजूदा व्यवस्था के अनुरूप बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर कई सामाजिक संगठनों ने इसे पुनर्विचार योग्य मुद्दा बताया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह विषय लंबे समय से संवेदनशील रहा है और इस पर अंतिम स्पष्टता के लिए व्यापक कानूनी विमर्श की जरूरत है।

बड़ा सवाल?

क्या धर्म परिवर्तन के साथ सामाजिक पहचान भी खत्म हो जाती है?
क्या आरक्षण का आधार केवल धर्म होना चाहिए या सामाजिक स्थिति?

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने एक बार फिर आरक्षण, धर्म और सामाजिक न्याय के जटिल संबंधों को केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में यह मुद्दा अदालतों से लेकर संसद और समाज तक व्यापक चर्चा का विषय बना रह सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1543
वोट करें

भारत की राजधानी क्या है?