रवि पाण्डेय / अमित मिश्रा
O- IGRS शिकायतों से मचा राजनीतिक भूचाल, पीड़ित परिवार बोला, “हम गरीब हैं, इसलिए हमारी जमीन छीनी गई… न्याय नहीं मिला तो जान भी जा सकती है”
सोनभद्र (उत्तरप्रदेश) । उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया और बेहद विस्फोटक विवाद सामने आया है। योगी सरकार के समाज कल्याण राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड़ पर सोनभद्र के आदिवासी और गरीब परिवार ने जमीन कब्जाने, फर्जी बैनामा कराने, आर्थिक हेराफेरी, दबाव बनाकर दस्तावेज तैयार कराने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

मामला सामने आने के बाद सोनभद्र से लेकर लखनऊ तक सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। शिकायतें सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक कार्यालय और उत्तर प्रदेश सरकार के IGRS जनसुनवाई पोर्टल तक पहुंच चुकी हैं।
अब सवाल केवल जमीन विवाद का नहीं, बल्कि सत्ता के प्रभाव, आदिवासी अधिकार, प्रशासनिक निष्पक्षता और कानून व्यवस्था पर उठ रहा है।
“भरोसा किया… और जमीन चली गई”
चोपन थाना क्षेत्र के ग्रामपंचायत कोटा के गुरमुरा टोला निवासी पारस गोंड़ ने आरोप लगाया है कि मंत्री संजीव कुमार गोंड़ ने भरोसे का फायदा उठाकर जमीन का “इकरारनामा” कराने के नाम पर “बैनामा” करा लिया।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि:
- दस्तावेज सही तरीके से पढ़ाए नहीं गए,
- सिर्फ हस्ताक्षर और अंगूठा लगवाया गया,
- और बाद में पता चला कि जमीन मंत्री के पुत्र अजय देव गोंड़ तथा करीबी लोगों के नाम दर्ज हो चुकी है।
सबसे बड़ा आरोप यह है कि बैनामा दस्तावेजों में लाखों रुपये भुगतान दिखाया गया, जबकि पीड़ित का कहना है:
“हमें एक रुपया तक नहीं मिला।”
10 लाख रुपये के कथित लेनदेन पर बड़ा सवाल
शिकायत में दावा किया गया है कि दस्तावेजों में करीब 10 लाख रुपये ट्रांसफर होने का उल्लेख दर्ज है।
लेकिन पारस गोंड़ का कहना है:
“न मेरे खाते में पैसा आया, न किसी और तरीके से भुगतान हुआ। पूरा खेल सिर्फ कागजों में दिखाया गया।”
यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला सिर्फ जमीन विवाद नहीं बल्कि कथित फर्जीवाड़ा, दस्तावेजी हेराफेरी और आर्थिक अपराध का बड़ा केस बन सकता है।
IGRS शिकायत बनी सत्ता के लिए सिरदर्द
पीड़ित परिवार ने उत्तर प्रदेश सरकार के IGRS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग की है। शिकायत संख्या:
- 40020026009409
- 40020026009408
इन शिकायतों में:
- जमीन वापस दिलाने,
- कथित फर्जी बैनामा की जांच कराने,
- और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
अब यह शिकायतें प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी हैं।
वही दुसरी तरफ मंत्री जी द्वारा पवन जायसवाल पर आरोप लगाने पर पवन जायसवाल ने भी गंभीर आरोप लगाए है।
अब सामने आया ‘हत्या की साजिश’ का आरोप
मामले ने और बड़ा मोड़ तब लिया जब ग्राम कोटा निवासी पवन कुमार ने भी पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र व IGRS भेजकर मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए।

पवन कुमार ने दावा किया कि:
IGRS संख्या – 40020026009567 मे आरोप लगाया है।
- वह पारस गोंड बनाम अजय देव के जमीन से जुड़े दस्तावेजों में गवाह है ,
- लेकिन न उसे और न विक्रेता पारस गोंड़ को कोई पैसा दिया गया,
- अब राज्यमंत्री पक्ष से जान-माल का खतरा पवन और पारस पर बना हुआ है।
उसने अपने पत्र में बेहद गंभीर आशंका जताते हुए लिखा:
“राज्यमंत्री सड़क दुर्घटना या किसी अन्य तरीके से मेरी हत्या करा सकते हैं।”
इस बयान के बाद पूरे मामले ने सनसनीखेज रूप ले लिया है।
“10 बिस्वा जमीन हड़पने” का आरोप
पवन कुमार के अनुसार वर्ष 2022 में लगभग 10 बिस्वा जमीन का इकरारनामा पारस गोंड और राज्यमंत्री के बीच हुआ था, जिसमे वह बतौर गवाह है लेकिन उसकी मां की तबीयत खराब होने के कारण रजिस्ट्री पूरी तरह पढ़ नहीं सका। यह बाद मे पता चला की पारस गोंड को जमीन का पैसा नहीं मिला है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अब उसी कागज को आधार बनाकर जमीन पर कब्जा और मालिकाना हक जताने की कोशिश की जा रही है।
पीड़ित का दावा है कि:
- लगातार दबाव बनाया जा रहा है,
- धमकियां दी जा रही हैं,
- और परिवार भय और दहशत के माहौल में जी रहा है।
पूर्वजों की जमीन पर कब्जे का आरोप
पवन कुमार ने बताया कि उसके दादा-परदादा वर्षों से ग्राम कोटा के परासपानी टोला की जमीन पर खेती करते चले आ रहे ।
लेकिन:
- गरीब और अशिक्षित होने के कारण उनके नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो सके।
जिस पर ग्राम प्रधान द्वारा 2007 मे गलत पट्टा कर दिया गया. जिसका न्यायालय मे वाद दायर किया गया है और वाद अभी लंबित है।
सोनभद्र में एक ही चर्चा “क्या सत्ता के दबाव में हुई रजिस्ट्री?”
सोनभद्र में अब यह मामला गांव-गांव और राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन चुका है।
ग्रामीणों के बीच लगातार यह सवाल उठ रहा है:
क्या एक आदिवासी और गरीब परिवार की जमीन सत्ता के प्रभाव में छीनी गई?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच आगे बढ़ी तो यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर सकता है।
सरकार और प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे विवाद ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं:
क्या मंत्री के खिलाफ निष्पक्ष जांच होगी?
क्या प्रशासन राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर कार्रवाई करेगा?
क्या कथित फर्जी बैनामा और पैसों के लेनदेन की जांच होगी?
क्या आदिवासी परिवार को न्याय मिलेगा?
क्या सरकार अपने ही मंत्री से जवाब मांगेगी?
विपक्ष को मिला बड़ा राजनीतिक हथियार
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मामला और तूल पकड़ता है तो विपक्ष इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना सकता है क्योंकि:
- आरोप सीधे सत्ता से जुड़े मंत्री पर हैं,
- पीड़ित आदिवासी समुदाय से हैं,
- और अब हत्या की आशंका तथा धमकी जैसे आरोप भी सामने आ चुके हैं।

पीड़ित का दर्द: “हम गरीब हैं, इसलिए हमारी जमीन चली गई”
पारस गोंड़ ने कहा:
“हम गरीब और अनपढ़ लोग हैं। हमने भरोसा किया और हमारी जमीन चली गई। अब न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।”
मंत्री जी खतौनी से हमारा नाम गलत तरीके से हटावा दिए है अगर खतौनी मे हमारा नाम नहीं था तब मंत्री जी अपने पुत्र अजय देव के नाम से बैनामा हमसे कैसे लिया ।
वहीं पवन कुमार ने कहा:
“अगर मुझे कुछ होता है तो उसकी जिम्मेदारी मंत्री और उनके सहयोगियों की होगी।”
अब निगाहें योगी सरकार पर
सोनभद्र से उठी यह शिकायत अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनती जा रही है।
अब पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर है कि:
क्या सरकार निष्पक्ष जांच कराएगी?
या






