हर घर नल जल के दावों पर सवाल, सोन नदी में उतरकर ग्रामीणों का जल सत्याग्रह

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अमित मिश्रा

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) । देशभर में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के सरकारी दावों के बीच ज़मीनी हकीकत की एक तस्वीर उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से सामने आई है। चोपन ब्लॉक की सिंदुरिया ग्राम पंचायत में हर घर नल योजना के तहत जलापूर्ति न होने से नाराज़ सैकड़ों ग्रामीण सोन नदी में उतर गए और जल सत्याग्रह करते हुए सांकेतिक धरना दिया।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दो से तीन वर्ष पूर्व पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़कों की खुदाई की गई, लेकिन आज तक घरों में नल की टोटी तक नहीं लगी। उनका कहना है कि योजना कागज़ों में पूरी दिखा दी गई, जबकि ज़मीन पर एक बूंद पानी नहीं पहुंचा।

नदी में उतरकर विरोध

प्रदर्शन के दौरान कई ग्रामीण अर्धनग्न होकर सोन नदी के दूषित पानी में बैठ गए। उनका कहना है कि जब घरों तक स्वच्छ पानी नहीं पहुंचा, तो उन्हें मजबूरी में इसी नदी का पानी पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इसे “बेबसी का प्रदर्शन” बताते हुए प्रशासन पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए।

स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका

स्थानीय लोगों के अनुसार दूषित पानी के कारण गांव में जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। महिलाओं और बच्चों को रोज़ाना दूर से पानी लाना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त कठिनाई हो रही है।

ग्रामीण प्रतिनिधि का आरोप

ग्रामीणों का नेतृत्व कर रहे योग गुरु अजय कुमार पाठक ने कहा कि योजना के तहत सर्वे और पाइपलाइन कार्य दिखाकर फाइलें बंद कर दी गईं, लेकिन जलापूर्ति शुरू नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन जिला मुख्यालय तक ले जाया जाएगा।

प्रशासन की चुप्पी…?

इस पूरे मामले में अब तक संबंधित विभाग की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सवाल ?

  • क्या हर घर नल योजना की मॉनिटरिंग में कमी है?
  • क्या ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाएं कागज़ों तक सीमित रह जा रही हैं?
  • जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

सोनभद्र का यह जल सत्याग्रह केवल एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में बुनियादी सुविधाओं की जमीनी स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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