शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि: काव्य संध्या में गूंजे देशभक्ति के तराने

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सोनभद्र। – साहित्य दीप संस्थान चुर्क के तत्वावधान में सोनभद्र बार एसोसिएशन सभागार में शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रौशन सिंह और राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी के बलिदान दिवस पर काव्य संध्या का आयोजन हुआ। वरिष्ठ गीतकार ईश्वर विरागी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण कुमार मिश्र और महामंत्री अखिलेश कुमार पांडेय ने दीप प्रज्ज्वलित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।काव्य संध्या का शुभारंभ वाणी वंदना से हुआ, जिसे सुधाकर पांडेय स्वदेश प्रेम ने प्रस्तुत किया। कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने “खाक कर दूंगी कांटों की हस्ती को मैं, जान मेरी फिदा है वतन के लिए” सुनाकर श्रोताओं में जोश भर दिया। दिलीप सिंह दीपक ने “गीत गजल मिले लफ्ज़ मिले पर, न हकीकत मिली और न सपना मिला है” से समां बांधा। संयोजक प्रद्युम्न त्रिपाठी ने “जिनके बदौलत राष्ट्र सुरक्षित मेरी सीमा” सुनाकर शहीदों को याद किया।हास्य कवि सुनील चऊचक ने “बासी भात पर बेना मति हौंका” से श्रोताओं को हंसाया, वहीं प्रभात सिंह चंदेल ने “मेरे मस्तक पर हिंदुस्तान लिख देना” से राष्ट्रभक्ति का संचार किया। दयानंद दयालू ने लोकभाषा में “रोइ रोइ बेटी कहे बाबूजी हमार हो” सुनाकर नारी की पीड़ा उकेरी। सोन संगीत फाउंडेशन के सुशील मिश्रा ने देशभक्ति गीतों से माहौल को और भावुक बना दिया।अध्यक्षता करते हुए ईश्वर विरागी ने “खत हवाओं ने लिखे थरथराई पत्तियाँ” सुनाकर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दी। समाजसेवी कमलेश खांबे ने कवियों का सारस्वत अभिनंदन किया। दिलीप सिंह दीपक ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जयशंकर त्रिपाठी, आत्म प्रकाश तिवारी, बबलू दीक्षित, जे.बी. सिंह, हेमनाथ दिवेदी, संदीप कुमार शुक्ला, त्रिपुरारी मिश्रा समेत सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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