“रविदास के विचार आज भी प्रासंगिक” – जीत सिंह खरवार
सामाजिक समरसता और भाईचारे का दिया गया संदेश
सोनभद्र । संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के पावन अवसर पर उनकी जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर, काशी से पवित्र मिट्टी एवं कलश लेकर निकली भव्य कलश यात्रा शुक्रवार को जनपद सोनभद्र पहुंची।
इस अवसर पर सोनकर कटरा चण्डी होटल के पास दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री जीत सिंह खरवार, नगर पालिका अध्यक्ष रुबी प्रसाद, नगर मण्डल अध्यक्ष विनय श्रीवास्तव सहित भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं ने पुष्पमालाओं, पुष्पवर्षा और जयघोष के साथ यात्रा का भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया। इसके उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश की विधिवत स्थापना की गई।
यह कलश यात्रा गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में सामाजिक समरसता, समानता, सद्भाव, मानवता और भाईचारे का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से निकाली जा रही है। यात्रा जनपद सोनभद्र के विभिन्न गांवों एवं नगरों में भ्रमण कर समाज को एकता, सामाजिक न्याय और समरसता का संदेश देगी।
इस पावन कलश यात्रा के लिए 28 जुलाई को जनपद सोनभद्र का प्रतिनिधिमंडल काशी स्थित संत गुरु रविदास महाराज की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर पहुंचा था, जहां से श्रद्धापूर्वक पवित्र मिट्टी एवं कलश लेकर यात्रा का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर राज्यमंत्री जीत सिंह खरवार ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के विचार आज भी समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे। उनका जीवन सामाजिक समता, जातिगत भेदभाव के उन्मूलन, मानव सेवा और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देता है। यह कलश यात्रा उनके आदर्शों और संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी तथा सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को और अधिक सुदृढ़ करेगी।
इस अवसर पर पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मवीर तिवारी, पूर्व सांसद नरेन्द्र कुशवाहा, जिला उपाध्यक्ष/ब्लॉक प्रमुख अजीत रावत, बृजेश श्रीवास्तव, शंम्भू नारायण, जिला महामंत्री संतोष शुक्ला, जिला मंत्री अनिल सिंह, जिला उपाध्यक्ष अनुसूचित मोर्चा नीरज कनौजिया, मनीष अग्रहरी, अनवर अली, अनुपम तिवारी, धु्रवकंात द्विवेदी, धीरेन्द्र पाण्डेय, रमेश जायसवाल, विनोद सोनी, राजबहादुर, रीतु अग्रहरी, अभिषेक गुप्ता, अनिता, रवि केशरी, कुंवर चतुर्वेदी, धर्मवीर त्यागी, आलोक रावत, अशोक भारती सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।






