कांग्रेस सहित तीन दोषियो को उम्रकैद की सजा

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राजेश कुमार पाठक

एससी/एसटी एक्ट: 60- 60 हजार रूपये अर्थदंड, न देने पर 6- 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी

अर्थदंड की धनराशि में से 90 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी

साढ़े 11 साल पूर्व पति के घायल होने की झूठी सूचना देकर दलित महिला को साथ ले जाकर विद्यालय में किए गए सामुहिक दुष्कर्म का मामला

    सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। जनपद में साढ़े 11 साल पूर्व पति के घायल होने की झूठी सूचना देकर दलित महिला को साथ ले जाकर विद्यालय में सामुहिक दुष्कर्म किए जाने के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट आबिद शमीम की अदालत ने बुधवार को सुनवाई करते हुए तीन दोषियों को एससी/एसटी एक्ट में दोषसिद्ध पाकर उम्रकैद की सजा सुनाई। उनके ऊपर 60-60 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड न देने पर 6-6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि में से 90 हजार रुपये पीड़िता को मिलेगी।


    अभियोजन पक्ष के मुताबिक करमा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी दलित महिला (पीड़िता) ने एसीजेएम कोर्ट में धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत दिए प्रार्थना पत्र में अवगत कराया था कि वह अनुसूचित जाति की महिला है। विपक्षीगण नंदलाल, कांग्रेस व एक अन्य व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विधि अनुरूप विवेचना कराए जाने की मांग की थी।

    पीड़िता ने अवगत कराया था कि उसके पति शाहगंज थाना क्षेत्र के राजपुर गांव निवासी नंदलाल व कांग्रेस के साथ एक माह पूर्व काम के सिलसिले में गए थे। घटना 22 जुलाई 2014 की है। उसके घर पर नंदलाल, कांग्रेस व एक अन्य व्यक्ति मैजिक गाड़ी से आए और कहा कि उसके पति दुर्घटना में घायल हो गए हैं उन्हें करमा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ पैसे का प्रबंध करके साथ चलने को कहा तो उनकी बातों पर विश्वास करके घर में रखा 8 हजार रुपये लेकर चल दी। वे लोग उसे लेकर एक विद्यालय में चले गए। जब उसने कहा कि यहां क्यों लाए हो तो जाति सूचक शब्दों से गाली देने लगे और अकेला पाकर जबरन बारी बारी से तीनों ने उसके साथ सामुहिक दुष्कर्म किया। कहीं शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देकर वहीं अकेले छोड़कर चले गए। इसकी सूचना तत्काल करमा थाने में दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब एसपी को रजिस्टर्ड डाक से शिकायती पत्र भेजा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    कोर्ट के आदेश पर तीनों के विरूद्ध 5 सितंबर 2014 को दुष्कर्म, लूट, एससी/एसटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज किया गया। सीओ द्वारा मामले की विवेचना की गई और पर्याप्त सबूत मिलने पर नंदलाल, कांग्रेस व विनय सिंह के विरुद्ध कोर्ट में विवेचक ने चार्जशीट दाखिल किया था। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, 6 गवाहों के बयान तथा पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर तीन दोषियों नंदलाल, कांग्रेस तथा विनय सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई। इनके ऊपर 60- 60 हजार रूपये अर्थदंड लगाया गया है। अर्थदंड न देने पर तीनों को 6- 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित होगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि में से 90 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी।

    अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील सी शशांक शेखर कात्यायन ने बहस की।

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