स्कूल में नन्हे-मुन्नों ने सांस्कृतिक रंग में डूबकर मनाया सावन महोत्सव

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अमित मिश्रा

सोनभद्र। सावन की हरियाली और उत्सवधर्मिता के बीच प्रकाश जीनियस पब्लिक इंग्लिश स्कूल में शुक्रवार को सावन महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय का संपूर्ण वातावरण उल्लास और सांस्कृतिक रंग में रंगा हुआ दिखाई दिया। विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं पारंपरिक हरे परिधान में सजकर कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। विद्यालय परिसर में हरियाली और परंपरा का जीवंत संगम उस समय देखने को मिला, जब नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपनी प्रस्तुति से उपस्थित अभिभावकों और शिक्षकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत मेहंदी प्रतियोगिता और विभिन्न प्रकार की खेल गतिविधियों से हुई, जिसमें छात्राओं और शिक्षिकाओं ने अपनी प्रतिभा का सुंदर प्रदर्शन किया। बच्चों की हथेलियों पर सजी कलात्मक मेहंदी ने सावन की शोभा को और बढ़ा दिया। इसके बाद जब सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुए, तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और हर्ष के स्वर से गूंज उठा। कक्षा एल.के.जी. के नन्हे बच्चों ने ‘छोटा बच्चा जान के’ गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद यू.के.जी. के छात्र-छात्राओं ने ‘धड़क धड़क’ गीत पर अपनी लयबद्ध प्रस्तुति से सबका दिल जीत लिया। कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों ने ‘नमो नमो’ गीत पर सामूहिक नृत्य कर समां बांध दिया।

बच्चों की प्रस्तुतियों को देखकर उपस्थित अभिभावकों ने तालियों से उत्साहवर्धन किया और उनकी सराहना की। कार्यक्रम में बच्चों की तैयारी, आत्मविश्वास और समर्पण का स्तर स्पष्ट झलक रहा था। विद्यालय के प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद जैन ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों के भीतर आत्मविश्वास, रचनात्मकता और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों की निष्ठापूर्ण तैयारी, शिक्षकों के समर्पण और कार्यक्रम की गरिमा की सराहना की।

कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं की भी अहम भूमिका रही, जिन्होंने बच्चों को मंच पर लाने के लिए कठिन परिश्रम किया। इस अवसर पर संतोष कुमार पांडे, अंबर उपाध्याय, सुरेंद्र यादव, सीता पांडे, राजनंदिनी चौबे, दीप्ति दुबे, अनीता सोनी, रागिनी दुबे सहित कई शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। सभी ने इस सांस्कृतिक पर्व को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

स्कूल का यह सावन महोत्सव सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास, सामाजिक चेतना और पारंपरिक मूल्यों को आत्मसात करने का जीवंत प्रयास भी था। नन्हे-मुन्ने बच्चों की प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि उन्हें उचित मंच और प्रोत्साहन मिले, तो वे अपनी प्रतिभा से किसी को भी मंत्रमुग्ध कर सकते हैं।

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