प्रथम बैठक में वादकारी भवन निर्माण का ऐतिहासिक निर्णय

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सोनभद्र। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन सोनभद्र की सत्र 2025-26 की पहली आधिकारिक बैठक आज स्थानीय विधि भवन सभागार में उत्साहपूर्वक संपन्न हुई। बैठक में नवनिर्वाचित कार्यकारिणी ने पदभार ग्रहण किया और सर्वसम्मति से अधिवक्ता समुदाय के लंबे समय से चले आ रहे वादकारी भवन के निर्माण को मंजूरी दी। अधिवक्ताओं ने इसे ‘न्याय की सेवा में सुविधा और गरिमा’ की दिशा में बड़ा कदम बताया। बैठक की शुरुआत पूर्व अध्यक्ष जगजीवन सिंह एडवोकेट ने की। उन्होंने नवचुनी कार्यकारिणी का परिचय कराते हुए अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह एडवोकेट और महामंत्री राजेंद्र कुमार यादव एडवोकेट का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इसके बाद पूर्व उपाध्यक्ष पवन कुमार सिंह एडवोकेट ने शेष पदाधिकारियों को मंच पर आमंत्रित कर सम्मानित किया:

  • कोषाध्यक्ष : द्वारिका नाथ नागर एडवोकेट
  • वरिष्ठ उपाध्यक्ष : बिंदु यादव एडवोकेट
  • उपाध्यक्ष (10 वर्ष से ऊपर) : चतुर्भुज शर्मा एडवोकेट, संतोष कुमार यादव एडवोकेट
  • उपाध्यक्ष (10 वर्ष से नीचे) : आशुतोष कुमार पटेल एडवोकेट, आशुतोष कुमार पांडेय एडवोकेट
  • सचिव प्रशासन : वेद प्रकाश सिंह एडवोकेट, हरिद्वार एडवोकेट
  • सचिव पुस्तकालय : अभिषेक सिंह मौर्य एडवोकेट

नवनिर्वाचित अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा, “अध्यक्ष के रूप में मैं सभी सहयोगी अधिवक्ताओं को हार्दिक बधाई देता हूँ। यह गर्व का क्षण है। हमारा दायित्व केवल मुकदमे लड़ना नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली को मजबूत और सुगम बनाना भी है। वादकारी भवन का निर्माण इसी सोच का पहला ठोस परिणाम होगा।” महामंत्री राजेंद्र यादव ने कार्यसूची पेश करते हुए भवन के लिए भूमि, नक्शा और प्रारंभिक फंड की रूपरेखा रखी। प्रस्ताव पास होने पर हॉल तालियों से गूँज उठा। वादकारी भवन : जरूरत से नीति तक
बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं का कहना है कि वर्तमान में वाद-कारियों को बरामदे, सीढ़ियों और परिसर के कोनों में इंतजार करना पड़ता है—बारिश में छत नहीं, गर्मी में पंखा नहीं। प्रस्तावित वादकारी भवन में प्रतीक्षालय, पेयजल, शौचालय, बेट-अदालत सूचना काउंटर और प्राथमिक सहायता कोना रहेगा। वरिष्ठ उपाध्यक्ष बिंदु यादव ने बताया कि ‘क्विक विन’ मॉडल पर चरणबद्ध निर्माण आरंभ किया जाएगा; प्रथम चरण में ढांचा व बेसिक सुविधाएँ, फिर लाइब्रेरी विस्तार और अधिवक्ता चैंबर उन्नयन। कोषाध्यक्ष नागर ने कहा कि प्रारंभिक कोष के लिए सदस्य अंशदान, बार वेलफेयर फंड और स्वैच्छिक अधिवक्ता योगदान का मिश्रित रास्ता अपनाया जाएगा।

बैठक में सत्र 2025-26 की प्राथमिकताएँ भी तय हुईं—नए अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणा-सत्र, साइबर लॉ और एडीआर पर कार्यशाला, महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी बढ़ाने हेतु हेल्पडेस्क, और समयबद्ध सुनवाई के लिए बार-बेंच समन्वय। उपाध्यक्ष चतुर्भुज शर्मा ने पुराने रिकॉर्ड डिजिटलीकरण का प्रस्ताव रखा, जबकि उपाध्यक्ष आशुतोष पटेल ने विधिक साक्षरता शिविरों की वार्षिक कैलेंडर का खाका दिया। बैठक दो घंटे से ऊपर चली, बीच-बीच में वरिष्ठ-अधिवक्ताओं के अनुभव और युवाओं के सुझावों ने जीवंत विमर्श बनाया। अंत में सचिव प्रशासन वेद प्रकाश सिंह ने निर्णयों का प्रतिवेदन पढ़ा और हरिद्वार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उपस्थित अधिवक्ताओं में राजेश कुमार यादव, प्रेम प्रताप विश्वकर्मा, विमल प्रसाद सिंह, सुरेश सिंह कुशवाहा, रामगुल्ली यादव, प्रदीप मौर्य, प्रवीण कुमार, राकेश कुमार सिंह, मृगराज सिंह, कामता प्रसाद यादव, दसरथ यादव, सुदेश कुमार, सत्यम शुक्ला, रामप्रसाद यादव, राजकुमार पटेल, टीटू गुप्ता, शाहनवाज़ आलम खान, रविंद्र पटेल सहित अनेक सदस्य मौजूद रहे। बैठक का समापन अध्यक्षीय उद्बोधन से हुआ: “न्याय की पहली सीढ़ी सुविधा है। वादकारी भवन आने वाले दशकों की नींव है—आज हमने उस नींव पर हस्ताक्षर किए हैं।” इस निर्णय को सोनभद्र अधिवक्ता समुदाय की एकजुटता और दूरदर्शी सोच के रूप में देखा जा रहा है।

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