सियासत से सुरों तक: सांसद ने गुरु पूर्णिमा पर गाया बिरहा

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अमित मिश्रा

O- सपा सांसद छोटेलाल सिंह खरवार के गाने पर राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई नई चर्चा

सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के सांसद छोटेलाल सिंह खरवार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह कोई राजनीतिक बयान या संसद में भाषण नहीं, बल्कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में मंच से बिरहा शैली में गुरु महिमा का गायन है। सांसद का यह अलग अंदाज लोगों के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन गया। सांसद की सार्वजनिक पहचान खेती-किसानी और लोक कलाकार की पृष्ठभूमि से भी जुड़ी रही है।

कार्यक्रम में सांसद ने पारंपरिक बिरहा के माध्यम से गुरु की महिमा का वर्णन किया। मंच पर उनके गायन के दौरान मौजूद लोगों ने तालियों से स्वागत किया और कई लोगों ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह कार्यक्रम क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्वांचल की राजनीति में लोक संस्कृति और लोकभाषा का हमेशा विशेष प्रभाव रहा है। ऐसे आयोजनों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी उन्हें आम जनता, विशेषकर ग्रामीण और पारंपरिक मतदाताओं से जोड़ने का माध्यम भी बनती है। हालांकि, यह विश्लेषण है और इसे किसी आधिकारिक राजनीतिक रणनीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

सपा सांसद का यह अंदाज ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में विभिन्न दल लगातार जनसंपर्क बढ़ाने और सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे कार्यक्रम राजनीतिक संदेश देने के साथ-साथ सामाजिक जुड़ाव का माध्यम भी बनते हैं।

राजनीतिक हलकों में इस कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। कुछ इसे सांसद की सांस्कृतिक पहचान और सहज व्यक्तित्व का प्रदर्शन मान रहे हैं, तो कुछ इसे जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की एक सकारात्मक जनसंपर्क पहल के रूप में देख रहे हैं। इन प्रतिक्रियाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

रॉबर्ट्सगंज संसदीय क्षेत्र में सांसद छोटेलाल सिंह खरवार पहले भी अपने अलग अंदाज, लोकभाषा और जमीनी शैली के कारण चर्चा में रहे हैं। संसद के भीतर और क्षेत्रीय कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय उपस्थिति अक्सर सुर्खियां बटोरती रही है।

गुरु पूर्णिमा जैसे आध्यात्मिक पर्व पर बिरहा के माध्यम से गुरु परंपरा का गुणगान कर सांसद ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि भारतीय लोक संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा आज भी समाज की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। कार्यक्रम के बाद उनके इस अंदाज को लेकर क्षेत्र में चर्चा लगातार जारी है।

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