आस्था बनाम प्रशासन! रामलीला मैदान पर सीएससी निर्माण को लेकर भड़का ग्रामीणों का आक्रोश

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सी एस पाण्डेय

O- 30 वर्षों से हो रही रामलीला पर संकट, ग्रामीणों ने कहा, धार्मिक स्थल पर कब्ज़ा बर्दाश्त नहीं

बभनी (सोनभद्र) । उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के बभनी थाना क्षेत्र अंतर्गत बरवाटोला गांव में रामलीला मैदान पर कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) निर्माण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने इस निर्माण का कड़ा विरोध करते हुए इसे धार्मिक आस्था पर सीधा हमला करार दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन दशकों से अधिक समय से इसी मैदान में रामलीला सहित अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन होते आ रहे हैं। इसके बावजूद ग्राम पंचायत द्वारा यहां सीएससी का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे गांव की धार्मिक परंपरा और भावनाएं आहत हो रही हैं।

प्रधान पुत्र पर गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रधान पुत्र द्वारा मनमाने ढंग से इस धार्मिक स्थल पर निर्माण कराया जा रहा है, जबकि ग्राम पंचायत में अन्य स्थानों पर पर्याप्त खाली भूमि उपलब्ध है। सवाल यह उठ रहा है कि जब वैकल्पिक भूमि मौजूद है, तो रामलीला मैदान को ही क्यों चुना गया?

राजस्व टीम पहुंची, फिर भी जारी रहा काम

मामले की गंभीरता को देखते हुए रविवार को राजस्व विभाग की टीम रामलीला मैदान पहुंची। ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए मैदान को संरक्षित रखने की मांग की। ग्रामीणों का दावा है कि इससे पहले ब्लॉक सचिव और लेखपाल भी इस स्थल पर निर्माण न करने की सलाह दे चुके हैं, बावजूद इसके कार्य जारी रहा।

धमकी देने का आरोप, एडीओ ने किया खंडन

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जांच के दौरान एडीओ पंचायत द्वारा उन्हें धमकाया गया और कहा गया कि यदि निर्माण रोका गया तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। हालांकि, एडीओ पंचायत सतीश कुमार सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ग्रामीणों से किसी प्रकार की धमकी भरी बातचीत नहीं की गई।

हिंदू संगठनों का भी समर्थन

इस विरोध प्रदर्शन में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने भी खुलकर समर्थन दिया। प्रदर्शन में भगवानदास, राधेश्याम, कमल यादव, बसंत लाल, विमलेश पांडे, दया प्रसाद, गौतम, नक्षत्र, दौलत प्रसाद, सुबह राम, बलवंत, दीपक, कलिता, रीता देवी, मालती, जितेंद्र सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

बड़ा सवाल

क्या सरकारी योजनाओं के नाम पर धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को मिटाया जाएगा?
क्या स्थानीय प्रशासन ग्रामीणों की आस्था से बड़ा हो गया है?

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य तत्काल रोका जाए और रामलीला मैदान को भविष्य के लिए सुरक्षित घोषित किया जाए।

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