60 गांव अंधेरे में डूबे, बिजली कटते ही पेयजल संकट गहराया

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नवीन कुमार

जरा-सी आंधी-बारिश में गिर रहे खंभे-तार, नवरात्र पर व्रतधारियों को दोहरी मार

कोन (सोनभद्र)। शुक्रवार दोपहर आई आंधी-बारिश ने कोन और कचनरवा सबस्टेशन से जुड़े लगभग 60 गांवों की बिजली व्यवस्था ठप कर दी। 33 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन के खंभे और तार गिरने से पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब गया। इससे करीब डेढ़ लाख की आबादी प्रभावित हुई है।

बिजली कटने का सीधा असर पेयजल आपूर्ति पर पड़ा है। हैंडपंप और जलकुंड बंद हो जाने से लोग पानी के लिए भटक रहे हैं। नवरात्र के दौरान व्रतधारी श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कई गांव प्रभावित

कुड़वा, कचनरवा, बागेसोती, मिश्री, डोमा, खरौंधी, रामगढ़, पड़रक्ष, हर्रा, नौडीहा, महुद्दीनपुर समेत कई गांव अंधेरे और जल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह से ही पानी की बूंद-बूंद के लिए भटकना पड़ रहा है।

चरमराई बिजली व्यवस्था

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग की व्यवस्था इतनी कमजोर है कि हल्की आंधी-बारिश में ही खंभे और तार टूटकर गिर जाते हैं। यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि हर बार बारिश और तूफान में यही हाल होता है। बिजली बहाली में कई-कई दिन लग जाने से नाराजगी बढ़ती जा रही है।

भारी बिल, सुविधाएं नदारद

गांवों के उपभोक्ताओं ने बताया कि बिजली बिल लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सुविधा नाम की कोई चीज नहीं है। मुश्किल से कुछ घंटे ही बिजली मिलती है, उसमें भी वोल्टेज की समस्या बनी रहती है। लोगों ने सवाल उठाया कि “जब सुविधा नहीं तो भारी-भरकम बिल क्यों वसूला जा रहा है?”

सोलर और जनरेटर बने सहारा

ग्रामीणों ने बताया कि मजबूरी में अब लोग सोलर पैनल और डीजल जनरेटर का सहारा ले रहे हैं। जिनके पास साधन है वे जुगाड़ कर रहे हैं, लेकिन गरीब तबका अंधेरे और पानी की किल्लत से सबसे ज्यादा त्रस्त है।

मरम्मत में जुटा विभाग

शनिवार सुबह से विद्युत विभाग की टीमें गिरे हुए खंभों और तारों को ठीक करने में लगी रहीं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शाम तक आपूर्ति बहाल करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि कितने खंभे और तार गिरे हैं। विभाग ने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर बिजली आपूर्ति शुरू की जाएगी।

ग्रामीणों की मांग: स्थायी समाधान

ग्रामीणों का कहना है कि विभाग को सिर्फ वसूली की चिंता रहती है, जबकि जमीनी सुधार पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। लोगों ने मांग की कि केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि स्थायी व्यवस्था करनी होगी ताकि हर बार आंधी-बारिश में खंभे और तार गिरने की नौबत न आए।

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