मोटे अनाज और परंपरागत बीजों का सरंक्षण जरूरी –जगत नारायण

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O संविधान यात्रा में संस्कृति और भाषा पर चर्चा

म्योरपुर (सोनभद्र)। दुद्धी विकास खंड के ग्राम पंचायत बघाडू के मझियान टोला में बुधवार को बनवासी सेवा आश्रम के आयोजन में सामाजिक कार्यकर्ताओं का संविधान यात्रा पहुंचा। अमृत लाल की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन कर संविधान प्रदत्त अधिकारों और कर्तव्य को लेकर चर्चा की गई।
अपने संबोधन में पर्यावरण कार्यकर्ता जगत नारायण विश्वकर्मा, राकेश कुमार, चंद्रावती, मनोज कुमार यादव ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में संस्कृति, और परंपराएं एक साजिश के तहत बदला जा रहा है जिसे हम परिवर्तन मान रहे है। असल में यह स्वाभाविक प्रक्रिया न होकर साजिश का हिस्सा है। हम खुद की भाषा और खान पान को गंवारो की भाषा समझने लगे है। और बोलने में हिचकते है। इसी तरह मोटे अनाज को भोजन का हिस्सा मानने से इनकार करने लगे है।
सावा, मेडो, कोदो, मिझरी, मडूआ को नजरअंदाज करने लगे है। अब मोटे अनाज शहर के लोगों के भोजन का हिस्सा बन गया है। इसका मतलब है मोटे अनाज फायदेमंद है। कहा कि आज हमारे पास साग सब्जी, और दलहन के बीज नहीं रह गए मतलब हम कंपनियों के गुलाम हो रहे है। जब खुद के पास बीज नहीं होंगे तो मनमाना दाम पर बीज खरीदना मजबूरी हो जाएगा।
राम अवध ने कहा कि हम भारत के नागरिकों के लिए संविधान लिखा गया है हम उसी के आधार पर समता मूलक समाज वादी सोच पर देश का विकास चाहते है लेनिन नियम के साथ कर्तव्य भी संविधान का अहम हिस्सा है। सभी ने संकल्प लिया कि वे जाति धर्म में उलझने के बजाय सामाजिक निर्माण में योगदान करेंगे। स्त्री, पुरुष में भेद नहीं करेंगे। गांव में एक भी बाल विवाह नहीं होगा।

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