वेदो की ओर लौट कर ही मानव जाति का कल्याण :डॉ अशर्फी लाल

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अमित मिश्रा

आर्य समाज के 54 वार्षिकोत्सव का वैदिक प्रवचन व भजन के साथ हुआ शुभारम्भ

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। जनपद में आर्य समाज के 54 वार्षिकोत्सव की शुरुआत वैदिक रीति रिवाज एवं भजन कीर्तन के साथ बड़े ही उत्साहवर्धन के साथ महर्षि दयानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रेणुकूट के प्रांगण में शुभारम्भ हुआ। इस दो दिवसीय समारोह के पहले दिन विभिन्न जनपदों से आए आर्य समाज से संबंधित विद्वानों ने अपने-अपने विचारों और भजनों के माध्यम से लोगों को वेदों के अनुसार जीवन जीने के सूत्र बताये गये।


प्रथम सत्र में महायज्ञ एवं झंडारोहण कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। आर्य समाज के प्रकांड विद्वानों के द्वारा प्रवचन एवं भजन के माध्यम से वेदों के महत्व और आर्य समाज के जीवन सिद्धांतों के मूल मन्त्रो का वर्णन किया गया।


वहीं दूसरे सत्र की शुरुआत में अतिथियों एवं आर्य समाज के विद्वानों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। गुरुकुल सिराथू प्रयागराज से आए विद्वान डॉक्टर अशर्फी लाल शास्त्री ने यज्ञ और वेद के महत्व को बताते हुए कहा कि “वेदों की ओर लौटकर ही हम संपूर्ण मानव जाति का कल्याण संभव है। हम सभी को इस महानतम ग्रंथ वेद का अध्ययन करते हुए ही आचरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यज्ञ दान और तप जीवन भर हम सभी को करना चाहिए यह आर्य समाज का मूल मंत्र है ऐसा करने से साधारण मनुष्य भी पवित्र हो जाता है।


मिर्जापुर से चलकर आए भजनोंपदेशक जीवन सिंह और मधु आर्या, मैनपुरी से आए पंडित राजेश कुमार आर्य ने भी वेदों को जीवन का आधार बताया है। विद्वानों ने कहा कि वेदों के माध्यम से ही जीवन और सत्य की पहचान हो सकेगी पुण्य और पाप का भोग हमारे कर्मों पर निर्भर करता है। हम सभी को अपने कर्मों के अनुसार ही इसका फल मिलता है। हम सभी को वेदों के ज्ञान का अनुसरण करते हुए वेद के बताये मार्ग पर चलना चाहिए। यही मूल मानवतावादी जीवन का सिद्धांत है।


आर्य समाज के नियम एवं सिद्धांतों सिद्धांतों पर चलने के लिए सभी को प्रेरित किया गया। शांति पाठ, प्रसाद वितरण के साथ पहले दिन का समापन हुआ इस मौके पर खिरधरलाल, महेंद्र नाथ आर्य, अवकाश बाबू दयाराम सिंह, विनोद कुमार आर्य, दिग्विजय सिंह, रमेश कुमार सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।


इस कार्यक्रम का संचालन रमेश कुमार सिंह ने बड़े ही उत्साहवर्धक और पूरे मनोयोग के साथ किया। उन्होंने भी जीवन में वेद को अपनाने का मंत्र दिया।

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