रामकथा मे अहिल्या उद्धार व पुष्प वाटिका प्रसंग का हुआ वर्णन

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सोनभद्र।
रावर्ट्सगंज नगर के अन्तर्गत अशोकनगर अकड़हवा पोखरा स्थित रामजानकी मंदिर पर चल रहे नव दिवशीय 27 जनवरी से 4 फरवरी तक चलने वाले श्री रामकथा मे चतुर्थ दिवस की कथा के क्रम मे उपस्थित श्रद्धांलुओं को कथा वाचक द्वारा रामकथा मे अहिल्या उद्धार व पुष्प वाटिका प्रसंग का वर्णन किया गया। काशी की धरा से पधारे कथा वाचक मानस किंकर नीरजानन्द महराज ने बताया कि एक बार भगवान राम को रास्ते मे निर्जन आश्रम दिखाई दिया। वहाँ पत्थर की शिला देखकर भगवान राम ने विश्वामित्र से उसके बारे मे पूछा उन्होंने बताया की यह गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या थी। वे अत्यन्त पतिव्रता, धर्म परायण और तपस्वनी नारी थी। एकबार देवराज इंद्र ने छलपूर्वक ऋषि गौतम का वेश धारण कर अहिल्या जी के आश्रम मे प्रवेश किया सत्य का ज्ञान होने पर भी अहिल्या जी उस छल मे फस गईं। जब ऋषि गौतम को ज्ञात हुआ तो वे अत्यन्त क्रोधित हो गये। और उन्होंने इंद्र को श्राप दिया व अहिल्या को पत्थर होने का श्राप दे दिया। फिर भगवान राम ने अहिल्या का उद्धार कर आगे मिथिला के लिये बढ़े। उन्होंने बताया की मिथिला मे पहुंचने के बाद भगवान राम गुरु विश्वामित्र व भ्राता लक्ष्मण सहित अमवारी अर्थात आम के बगीचे मे बैठे और पुष्प वाटिका देखने की इच्छा से पुष्पवाटिका मे प्रवेश किया। यज्ञ का संचालन राम जानकी मंदिर के प्रधान पुजारी पं0 नीरजानन्द मिश्र द्वारा किया गया साथ ही उन्होंने नगर वासियों से अपील भी किया कि अधिक से अधिक संख्या मे राम कथा मे उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित करे। इस मौके पर राम चरित मानस के परायण कर रहे मानस हंस श्यामबली पाठक व यज्ञ के आचार्य पं0 राजन पाण्डेय व पं0 मनोज कुमार दीक्षित पं0 अनूप पाण्डेय, मुख्य यजमान अरविन्द देव पाण्डेय, कपिल मुनि मिश्र, राजेश शुक्ल, संतोष सिंह, मनोरथ मिश्र, राजू पाण्डेय, संजय पाण्डेय, कृष्ण कुमार मिश्र, विनय, मनोज सिंह, नितेश पाठक अरविन्द दुबे इत्यादि लोग मौजूद रहे।

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