सोनभद्र में जमीन आवंटन घोटाले पर प्रशासनिक कार्रवाई: डीएम ने चार पट्टे किए निरस्त, भूमिहीनता के दावों पर उठे सवाल

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अमित मिश्रा 8115577137

O- EXCLUSIVE: न्यूज़ एक्सप्रेस भारत की पड़ताल पर लगी सरकारी मुहर, सोनभद्र में चार आवासीय पट्टे निरस्त

O- जिसे भूमिहीन बताया गया, जांच में निकली जमीन; हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला, डीएम ने रद्द किए चार आवंटन

O- हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हुई सुनवाई; जांच में पात्रता पर खरे नहीं उतरे लाभार्थी, ग्राम पंचायत लहसा का मामला

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)। भूमिहीनों को आवासीय भूमि उपलब्ध कराने की सरकारी नीति के बीच सोनभद्र जिले के एक बहुचर्चित आवास आवंटन मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी सोनभद्र ने ग्राम पंचायत लहसा में किए गए चार आवासीय पट्टों को निरस्त कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि जांच और अभिलेखों के परीक्षण के दौरान संबंधित लाभार्थी आवासीय पट्टे के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों पर खरे नहीं पाए गए। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 66 के तहत जिलाधिकारी को अनियमित आवास आवंटन की जांच और उसे निरस्त करने का अधिकार प्राप्त है।

यह मामला रॉबर्ट्सगंज तहसील के ग्राम पंचायत लहसा से जुड़ा है, जहां वर्ष 2025 में ग्राम सभा की भूमि पर आवासीय पट्टों का आवंटन किया गया था। आवंटन के खिलाफ शिकायतें सामने आने के बाद मामला राजस्व न्यायालय पहुंचा और बाद में उच्च न्यायालय के निर्देशों के आलोक में विस्तृत सुनवाई की गई।

क्या पाया गया जांच में

जिलाधिकारी द्वारा पारित आदेश के अनुसार, सुनवाई के दौरान खतौनी, परिवार रजिस्टर, आय एवं जाति प्रमाण पत्र सहित विभिन्न राजस्व अभिलेखों का परीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि जिन व्यक्तियों को भूमिहीन अथवा पात्र श्रेणी में दिखाकर आवासीय भूमि आवंटित की गई थी, उनके परिवारों के नाम पहले से भूमि दर्ज थी।

आदेश में कहा गया है कि आवासीय पट्टे का उद्देश्य वास्तविक भूमिहीन और जरूरतमंद परिवारों को लाभ पहुंचाना है। ऐसे में यदि किसी लाभार्थी या उसके परिवार के पास पहले से भूमि उपलब्ध है तो वह आवंटन की पात्रता पर सीधा प्रश्न खड़ा करता है।

चार लाभार्थियों के आवंटन रद्द

जिलाधिकारी ने जिन चार व्यक्तियों के आवंटन निरस्त किए हैं, उनमें-

  • पूजा पत्नी राहुल चेरी
  • विजय कुमार पुत्र शिवदुलारे
  • अनीता पत्नी रामपाल
  • बुदली पत्नी बहादुर

शामिल हैं।

इन सभी को ग्राम सभा की भूमि संख्या-230 पर आवासीय पट्टे आवंटित किए गए थे। आदेश के बाद संबंधित भूमि पुनः ग्राम सभा के अभिलेखों में दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

जिस मुद्दे को स्थानीय स्तर पर उठाया गया, उस पर लगी प्रशासनिक मुहर

यह मामला लंबे समय से स्थानीय स्तर पर चर्चा में था। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि आवासीय पट्टों के चयन में पात्रता मानकों की अनदेखी की गई और वास्तविक भूमिहीनों को लाभ से वंचित कर दिया गया।

स्थानीय मीडिया और जनप्रतिनिधियों द्वारा भी समय-समय पर इस मामले को उठाया गया था। अब जिलाधिकारी के विस्तृत आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि प्रशासन ने शिकायतों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए अभिलेखीय जांच की और उसके आधार पर कार्रवाई की।

हाईकोर्ट तक पहुंचा था विवाद

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब आवंटन के खिलाफ न्यायालयी चुनौती दी गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद संबंधित आपत्तियों के निस्तारण का निर्देश दिया गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने सभी पक्षों को सुनकर और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण कर अंतिम निर्णय सुनाया।

चार पट्टों के निरस्तीकरण के बाद अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या केवल यही आवंटन अनियमित थे या फिर पूरी प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पात्रता संबंधी अनियमितताएं इन मामलों में पाई गई हैं, तो अन्य आवंटनों की भी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक भूमिहीन परिवारों को उनका अधिकार मिल सके।

न्यूज़ एक्सप्रेस भारत ने पहले ही किया था खुलासा

जब अधिकांश लोग इस आवंटन को सामान्य प्रक्रिया मान रहे थे, तब न्यूज़ एक्सप्रेस भारत ने इस पूरे प्रकरण की पड़ताल कर कई गंभीर सवाल उठाए थे।

रिपोर्ट में पूछा गया था-

क्या सभी लाभार्थी वास्तव में भूमिहीन थे?

क्या ग्राम सभा में पात्रता की सही जांच हुई थी?

क्या वास्तविक जरूरतमंदों को दरकिनार किया गया?

क्या आवंटन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई?

अब जिलाधिकारी के आदेश ने इन सवालों को नई मजबूती दे दी है।

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के तहत ग्राम सभा की भूमि पर आवासीय पट्टे केवल पात्र और भूमिहीन व्यक्तियों को दिए जा सकते हैं। यदि किसी आवंटन में अनियमितता पाई जाती है, तो जिलाधिकारी जांच कर उसे निरस्त कर सकते हैं।

सोनभद्र का यह मामला अब ग्रामीण आवासीय जमीन आवंटन व्यवस्था में पारदर्शिता, पात्रता और जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

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