राजेश कुमार पाठक
करीब साढ़े 7 वर्ष पूर्व घर में घुसकर 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म किए जाने एवं आत्महत्या के लिए उकसाने का था आरोप
अभियोजन पक्ष दोषसिद्ध करने में रहा असफल
सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। जनपद में करीब साढ़े 7 वर्ष पूर्व घर में घुसकर 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ हुए दुष्कर्म व आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने वृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए साक्ष्य के अभाव में आरोपी नीरज गिरी को दोषमुक्त करार दिया। अभियोजन पक्ष दोष सिद्ध करने में असफल रहा।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक पन्नूगंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता के पिता ने 28 जून 2018 को पन्नूगंज थाने में दी तहरीर में आरोप लगाया था कि 24 जून 2018 को वह अपनी पत्नी व बच्चों के साथ मौसी की लड़की की शादी में गया था। घर पर उसकी दो नाबालिग बेटियां उम्र क्रमशः 16 वर्ष व 13 वर्ष थीं। 24 जून 2018 को नीरज गिरि पुत्र संतधारी गिरि निवासी परसिया, थाना पन्नूगंज उसकी 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ किया। 26 जून 2018 को जब घर पहुंचा तो घर के अंदर से नीरज गिरि निकल कर भाग गया। जब घर के अंदर पत्नी के साथ गया तो बेटी ने बताया कि नीरज गिरि उसके साथ बुरा काम कर रहा था इसलिए वह डरकर भाग गया। उसने उसके मुंह में दुपट्टा रखकर मुंह बंद कर दिया था। बेटी ने यह भी बताया कि 24 जून 2018 को भी नीरज गिरि उसके साथ गलत काम करने का प्रयास किया था।
27 जून 2018 को इसी बात से दुखी होकर बेटी ने घर में रखे अनाज की जहरीली दवा खा ली। जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। लोक लाज के डर से व इलाज में व्यस्तता के कारण अब पुलिस को सूचना नही दे पाया था। जिस पर पुलिस ने 28 जून 2018 को एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दिया। पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने आरोपी नीरज गिरी के विरुद्ध घर में घुसकर दुष्कर्म करने, आत्महत्या के लिए उकसाने व पॉक्सो एक्ट में न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया था।
मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्को को सुनने, 12 गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर आरोपी नीरज गिरि (30) वर्ष को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया। अभियोजन पक्ष दोषसिद्ध करने में असफल रहा। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता धर्मेंद्र दुबे ने बहस की।







