करमा महोत्सव में देखने को मिला आदिवासी संस्कृति की झलक

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

नवीन कुमार

सेवा समर्पण संस्थान द्वारा आयोजित किया गया कार्यक्रम

कोन(सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)। ओबरा तहसील क्षेत्र के सेवा समर्पण संस्थान के तत्वावधान में बागेसोती स्थित कम्पोजिट विद्यालय में करमा महोत्सव का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया।इस कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी समाज के आराध्य भगवान बिरसा मुंडा तथा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन और करमा भगवान की पूजा-अर्चना के साथ किया गया। करमा महोत्सव का महत्व करमा पर्व आदिवासी समाज का प्रमुख त्यौहार है, जिसे हर वर्ष उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व में समाज के लोग आपसी रंजिश और गिले-शिकवे भूलकर एक साथ नृत्य-गान करते हैं और भाईचारे का संदेश पूरे समाज में फैलाते हैं। करमा भगवान की पूजा के साथ यह पर्व आदिवासी संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने का संकल्प भी देता है।

इस कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि शंशाक शेखर मिश्रा ने कहा कि करमा महोत्सव आदिवासी समाज की एकता और भाईचारे का प्रतीक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि मिल-जुलकर रहना ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है। पड़ोसी राज्यों में आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले भगवान बिरसा मुंडा को समाज ने देवतुल्य दर्जा दिया है। हम सबको उनके दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाना माता-पिता की जिम्मेदारी है, बाकी व्यवस्था सरकार करती है। प्रदेश में सिर्फ आदिवासी समुदाय के लिए दो विशेष स्कूल खोले गए हैं। इनमें से एक आपके क्षेत्र पीपरखड़ में है, जहाँ बच्चों को रहने, खाने, पढ़ाई, किताब, कॉपी और स्कूल ड्रेस तक की व्यवस्था पूरी तरह निःशुल्क है। इसलिए आप सभी अपने बच्चों को वहां अवश्य भेजें।

मुख्य वक्ताओं में सेवा समर्पण संस्थान के रामविचार नेताम और रामलखन ने अपने सम्बोधन में करमा महोत्सव की सामाजिक और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह पर्व आदिवासी समाज की पहचान है, और नई पीढ़ी को इस परंपरा से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।

इस दौरान आदिवासी संस्कृति की झलक पूरे आयोजन में आदिवासी समाज की लोक संस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिली। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के साथ युवाओं व महिलाओं ने करमा महोत्सव को जीवंत बना दिया। यह आयोजन न सिर्फ समाज को जोड़ने वाला साबित हुआ बल्कि आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने का भी एक बड़ा प्रयास रहा।

कार्यक्रम मे क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी, ग्राम प्रधान रामअवध भारती,राज कुमार, मनीष त्रिपाठी, ग्राम विकास अधिकारी अमरेंद्र परिदर्शी,राम प्रवेश, नागेंद्र, विनोद, धीरेंद्र प्रताप जायसवाल मौजूद रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नन्दलाल उरांव ने की और मंच संचालन सेवा समर्पण संस्थान के जय प्रकाश उरांव द्वारा किया गया।

IMG 20260928 WA0019
IMG 20260928 WA0020

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1544
वोट करें

भारत की राजधानी क्या है?