वनाधिकार कानून लागू करने, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और CSR फंड की जांच की उठी मांग
सोनभद्र। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) जिला काउंसिल सोनभद्र ने रिहंद बांध, कन्हार, नगवां सहित अन्य परियोजनाओं से विस्थापित परिवारों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रपति को 11 सूत्रीय मांगपत्र भेजा है। मांगपत्र में विस्थापितों को भौमिक और रोजगार का अधिकार, वनाधिकारों की रक्षा तथा स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की मांग की गई है।
जिला सह सचिव देव कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि 1960 में निर्मित रिहंद बांध से हजारों परिवार विस्थापित हुए, लेकिन आज तक अनेक परिवारों को सरकारी भूमि पर स्थायी भौमिक अधिकार और समुचित पुनर्वास नहीं मिला। विस्थापित परिवार आज भी रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास से वंचित हैं। स्थानीय युवाओं को उद्योगों में प्राथमिकता पर स्थायी रोजगार नहीं मिल रहा।
मांगपत्र में कहा गया है कि वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत पात्र आदिवासी और अन्य परंपरागत वन निवासियों को भौमिक अधिकार दिया जाए तथा 75 वर्ष की साक्ष्य संबंधी अनिवार्यता समाप्त की जाए। रिहंद जलाशय में बढ़ते प्रदूषण से जलीय जीव और पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, औद्योगिक प्रदूषण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी उद्योगों पर कार्रवाई हो।
स्वास्थ्य-शिक्षा की मांग
हाथीनाला से छत्तीसगढ़ सीमा तक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल व ट्रॉमा सेंटर, सरकारी इंटर कॉलेज, पॉलिटेक्निक और मेडिकल कॉलेज की स्थापना की मांग की गई है। बभनी के ग्राम पंचायत बरवा टोला (क) राजस्व गांव सालेनाग में चार वर्ष पूर्व ध्वस्त प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र के पुनर्निर्माण तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ नर्सों और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की तैनाती की मांग भी शामिल है।
भाकपा ने एनटीपीसी, एनसीएल, हिंडाल्को, कनोरिया केमिकल्स सहित उद्योगों के CSR फंड के उपयोग की सार्वजनिक जांच और धनराशि का लाभ विस्थापित गांवों तक पहुंचाने की मांग की है। आरोप लगाया कि करोड़ों खर्च के बावजूद प्रभावित गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।









