1-2 नवंबर को वाराणसी में होगा नई पीढ़ी संवाद, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दे पर उठी आवाज
ओबरा, सोनभद्र। आदिवासियों का मूल अधिकार और पहचान गहरे संकट का शिकार है। जल, जंगल, जमीन पर उनके संवैधानिक अधिकारों को छीना जा रहा है और जनगणना में आदिवासी धर्म कोड का कॉलम नहीं जोड़ा गया। वाराणसी में 1-2 नवंबर को आयोजित नई पीढ़ी संवाद में आदिवासियों के अधिकार पर चर्चा होगी। यह बात जुगैल के चाडम, पिपरा आदि गांव में हुई बैठक व संवाद में उठी। संवाद में ग्रामीणों ने बताया कि जुगैल में शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार का हाल बेहाल है। एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है जिसमें भी डॉक्टर नहीं रहते। इतनी बड़ी आबादी में पर्याप्त जूनियर हाईस्कूल तक नहीं है। सड़कें जर्जर हालत में हैं और शुद्ध पेयजल का अभाव है। हालत इतनी बुरी है कि तेंदू पत्ता तोड़ाई की मजदूरी तक लेकर ठेकेदार भाग गया। लोगों ने जुगैल जैसी ग्राम पंचायत को तीन ग्राम पंचायत में विभाजित करने की मांग भी की। संवाद का संचालन धनपाल गोंड ने किया। बैठक को ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर, रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान के संयोजक इंजीनियर रामकृष्ण बैगा, इंद्रदेव खरवार, श्यामलाल गोंड, रामलाल गोंड, मानसिंह गोंड, बलजीत सिंह, नंद कुमार, लक्ष्मण सिंह, सर्वेश कुमार, कमलेश सिंह, बलराम सिंह आदि ने संबोधित किया।









