अमित मिश्रा
सोनभद्र (उत्तरप्रदेश)। सोनभद्र के सरकारी प्राइमरी स्कूल से निकली अंतरिक्ष क्रांति की नई रोशनी, मोदी के NEP और योगी के कायाकल्प का बना राष्ट्रीय मॉडल

आर्यभट्ट खगोल प्रयोगशाला: 1.90 लाख में टाट-पट्टी वाला स्कूल बना NASA जैसी लैब, मजदूर के बच्चे VR से देख रहे हैं चांद, DM चर्चित गौंड और CDO जागृति अवस्थी ने किया उद्घाटन

सोनभद्र । एक तरफ देश चंद्रयान-3 और आदित्य L-1 की सफलता के बाद गगनयान की तैयारी में जुटा है, तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के आकांक्षी जिले सोनभद्र के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल ने जमीन पर ही अंतरिक्ष क्रांति की नींव रख दी है। यह कहानी किसी बड़े प्राइवेट स्कूल की नहीं, बल्कि एक ऐसे सरकारी स्कूल की है जहां 90 फीसदी बच्चे दलित, आदिवासी और ईंट-भट्ठा मजदूर परिवारों से आते हैं।

जिले के प्राथमिक विद्यालय लोढ़ी में स्थापित आर्यभट्ट खगोल विज्ञान प्रयोगशाला आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई शिक्षा नीति 2020 और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऑपरेशन कायाकल्प के सफल क्रियान्वयन का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरी है।
शुक्रवार को जिलाधिकारी चर्चित गौंड (भा.प्र.से.) और मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने संयुक्त रूप से फीता काटकर इस प्रयोगशाला का लोकार्पण किया। लोकार्पण के बाद अधिकारियों ने जब लैब का अवलोकन किया तो वे भी अभिभूत हो उठे।
क्या है इस लैब में जो इसे बनाता है खास?
विद्यालय के एक सामान्य से दिखने वाले कमरे को पूरी तरह से स्पेस लैब में परिवर्तित कर दिया गया है।
- त्रि-आयामी सौरमंडल: कक्षा की छत पर आठ ग्रहों वाला चलता-फिरता सौरमंडल अपनी कक्षा में घूमता है।
- इसरो कॉर्नर: एक दीवार पूरी तरह से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को समर्पित है, जहां चंद्रयान-3, आदित्य L-1 और गगनयान के मॉडल लगाए गए हैं।
- अत्याधुनिक तकनीक: बच्चों के लिए टेलीस्कोप और वर्चुअल रियलिटी (VR) बॉक्स की व्यवस्था है, जिसके माध्यम से बच्चे चांद के क्रेटर और मंगल की सतह का सजीव अनुभव कर रहे हैं।
- भारतीय ज्ञान परंपरा: दीवारों पर महान गणितज्ञ आर्यभट्ट, भास्कराचार्य से लेकर भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तक के चित्र और जीवन वृत्त लगाए गए हैं।
अधिकारियों ने क्या कहा?
जिलाधिकारी चर्चित गौंड (IAS) ने कहा –

“यह प्रयोगशाला NEP-2020 का जीवंत उदाहरण है। माननीय प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत-2047 और माननीय मुख्यमंत्री जी के ऑपरेशन कायाकल्प का विजन तभी साकार होगा, जब हमारा सरकारी स्कूल बदलेगा। सरकार की मंशा सिर्फ बच्चों को स्कूल तक लाना नहीं, बल्कि उन्हें दुनिया से कनेक्ट करना है। सोनभद्र आकांक्षी जिला है, यहां संसाधन की कमी हो सकती है, पर प्रतिभा की नहीं। पिछले एक वर्ष में जिले में परिषदीय विद्यालयों में नामांकन में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हमारा लक्ष्य है कि जिले के प्रत्येक विकास खंड में ऐसी एक मॉडल लैब स्थापित की जाए।”
मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी (IAS) ने कहा –

“प्रस्ताव के प्रारंभिक चरण में मुझे लगा था कि प्राथमिक स्तर के बच्चे खगोल विज्ञान जैसे गूढ़ विषय को कैसे समझेंगे। परंतु आज यहां आकर मेरी धारणा बदल गई। हमें बच्चों की जिज्ञासा को कम नहीं आंकना चाहिए। यह प्रयोगशाला ऑपरेशन कायाकल्प से एक कदम आगे की सोच है और शिक्षकों के अटूट समर्पण का प्रतिफल है। हमारा उद्देश्य है कि अंतिम पंक्ति के गरीब बच्चे के हाथ में पुस्तक के साथ विज्ञान का अनुभव भी हो। इस मॉडल को जिले के 20 अन्य विद्यालयों में दोहराया जाएगा।”
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा –

“यह लैब PM SHRI (PM Schools for Rising India) की अवधारणा पर आधारित है। इसे समग्र शिक्षा के नवाचार (Innovation) मद तथा ग्राम पंचायत निधि के समन्वय से मात्र 1.90 लाख रुपये की अल्प लागत में तैयार किया गया है। यह एक रेप्लिकेबल (दोहराने योग्य) मॉडल है। जिलाधिकारी महोदय के निर्देशन में इसे पूरे जनपद में विस्तारित किया जाएगा।”
शिक्षकों का समर्पण और बच्चों के सपने
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती सरोज शर्मा ने बताया कि विद्यालय में कुल 187 बच्चे पंजीकृत हैं। “हम चारों शिक्षक प्रतिदिन विद्यालय अवधि के पश्चात एक घंटा अतिरिक्त रुककर इस लैब को तैयार करते थे। जिलाधिकारी सर और CDO मैडम ने हमें आर्थिक और नैतिक दोनों प्रकार का संबल प्रदान किया। अब बच्चे स्वयं प्रातः 8 बजे विद्यालय आ जाते हैं।”
कक्षा-4 की छात्रा राधा, जिसके पिता ईंट-भट्ठे पर श्रमिक हैं, ने कहा, “दीदी किताब में पढ़ाती थीं कि पृथ्वी गोल है। आज हमने उसे घूमते हुए देखा। मैं कलेक्टर मैडम बनना चाहती हूं।”

कक्षा-5 के छात्र सोनू ने कहा, “हमने आज सैटेलाइट देखा। हम भी बड़ा होकर रॉकेट बनाएंगे।”
बहरहाल, लोढ़ी का यह छोटा सा कमरा आज यह संदेश दे रहा है कि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो टाट-पट्टी पर बैठने वाला मजदूर का बच्चा भी चांद को छूने का सपना देख सकता है।









